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बिहार पृथ्वी दिवस आज : बढ़ते तापमान से हो रही खतरनाक बीमारियां

Updated at : 09 Aug 2019 8:32 AM (IST)
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बिहार पृथ्वी दिवस आज : बढ़ते तापमान से हो रही खतरनाक बीमारियां

राजदेव पांडेय औसत बारिश में 30 से 40 फीसदी की कमी आयी पटना : पिछले 52 साल में बिहार के औसत तापमान में करीब डेढ़ से दो डिग्री का इजाफा हुआ है. बढ़ रहे तापमान से बिहार में रहस्यमयी बुखार मसलन चमकी और डेंगू जैसे बुखार और खतरनाक होते जा रहे हैं. इस बात का […]

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राजदेव पांडेय
औसत बारिश में 30 से 40 फीसदी की कमी आयी
पटना : पिछले 52 साल में बिहार के औसत तापमान में करीब डेढ़ से दो डिग्री का इजाफा हुआ है. बढ़ रहे तापमान से बिहार में रहस्यमयी बुखार मसलन चमकी और डेंगू जैसे बुखार और खतरनाक होते जा रहे हैं. इस बात का जिक्र ‘स्टेट एक्शन प्लान ऑन क्लाइमेट चेंज’ में किया गया है.
इसमें बताया गया है कि अगर धरती के बढ़ते तापमान पर काबू नहीं पाया गया, तो हमारी जैव समृद्धि के सामने संकट खड़ा हो जायेगा. दरअसल बढ़ते तापमान से डेंगू और दूसरे बुखारों के नेचर में बदलाव आया है, जिसकी वजह से इनकी जल्दी पहचान नहीं हो पा रही है. दरअसल बिहार की धरती पर पर्यावरणीय विसंगतियां तेजी से बढ़ रही हैं. औसत बारिश में 30 से 40 फीसदी की कमी आयी है. पर्यावरणीय विसंगति का ही यह आलम है कि उत्तरी बिहार की भौगोलिक पहचान बाढ़ और दक्षिणी बिहार की पहचान सूखे से हो रही है.
बिहार के वेटलैंड्स (नम भूमि) या ताल तलैया की लाखों हेक्टेयर भूमि अाबादी के बोझ तले गुम हो चुकी है. उदाहरण कांवर झील है. बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष एवं पर्यावरणविद अशोक घोष के मुताबिक बिहार की प्रसिद्ध कांवर झील का विस्तार 1984 में 6786 हेक्टेयर में था. वर्ष 2004 में इसका विस्तार घटकर 6043 हेक्टेयर और 2012 में घटकर 2012 हेक्टेयर रह गया है. बिहार की धरती के बढ़ते तापमान की वजहों में एक वजह नम भूमि का घटना भी है.

एक तिहाई से भी कम बचे वेटलैंड
राष्ट्रीय वेटलैंड एटलस के मुताबिक बिहार में वर्ष 2010 में 4416 वेट लैंड्स (नम भूमि) की पहचान की गयी थी, जिसमें 100 हेक्टेयर वाले 130 वेटलैंड्स थे. इसके अलावा 17582 वेट लैंड्स (2.25 हेक्टेयर से छोटे) की पहचान भी की गयी थी. उस समय बिहार के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में वेटलैंड का हिस्सा 4032.09 वर्ग किमी (लगभग 4.4 प्रतिशत) था. अब यह एक तिहाई से भी कम बचा है.
एक्सपर्ट व्यू
तापमान की अधिकता बैक्टीरियल और जर्म ग्रोथ को कई गुना बढ़ा देती है. अधिक तापमान और बढ़ी हुई आर्द्रता बैक्टीरियल संक्रमण की रफ्तार में अप्रत्याशित इजाफा करती है. अगर स्थायी तौर पर तापमान बढ़ा हुआ रहे तो निश्चित तौर पर वहां बीमारियां पैर पसारने लगती हैं. इस दौरान ग्रीन हाउस गैसें भी खतरनाक रूप ले लेती हैं. ‘

– प्रो परिमल कुमार खान, जूलॉजी, पटना विश्वविद्यालय

चक्रवाती हवाओं की गिरफ्त में शहर

पटना : गुरुवार को राजधानी चक्रवाती
पुरवा हवा की चपेट में रही. इसकी वजह से शहर के उच्चतम तापमान में अच्छी खासी गिरावट आयी. उच्च तापमान सामान्य से दो डिग्री नीचे 31 डिग्री दर्ज किया गया. न्यूनतम तापमान भी 26़ 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. दिन भर चली इन ठंडी हवाओं से शहर को उमस और गर्मी से राहत मिली. पूरा दिन खुशनुमा रहा. मानसून के लिहाज से पटना समेत समूचे बिहार के लिए अगले 48 घंटे अहम होंगे,क्योंकि ट्रफ लाइन ऊपर की ओर शिफ्ट हो सकती है. हालांकि अभी ट्रफ लाइन मध्य भारत पर मेहरबान है. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक गुरुवार की तरह ही अगले दो से तीन दिन तेज हवाओं के साथ हल्की बूंदाबांदी होने के आसार बने रहेंगे. इस दौरान झमाझम बारिश के आसार नहीं है.
पटना : स्कूलों में प्रार्थना के समय बच्चे लेंगे संकल्प
पटना : नौ अगस्त को ‘बिहार पृथ्वी दिवस’ मनाया जायेगा. सभी सरकारी और गैर-सरकारी विद्यालयों को प्रार्थना के समय बच्चों को पृथ्वी को बचाने के लिए 11 संकल्प दिलाये जायेंगे. इस दौरान बच्चों को बताया जायेगा कि धरती पर किस तरह पर्यावरणीय विसंगतियां जन्म ले रही हैं, जिससे जन जीवन खतरे में पड़ता जा रहा है. वन एवं पर्यावरण विभाग की पहल पर शिक्षा विभाग द्वारा इस तरह का आयोजन किया जा रहा है. इस दिवस के जरिये पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की योजना है.
ये संकल्प
पृथ्वी के संरक्षण तथा पर्यावरण संतुलन को
बनाये रखने के लिए काम करूंगा.
वर्ष में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाऊंगा, बचाऊंगा तथा पेड़-पौधों के संरक्षण में सहयोग करूंगा.
तालाब, नदी एवं
पोखर को प्रदूषित नहीं करूंगा.
जल का दुरुपयोग
नहीं होने दूंगा . बिजली का अनावश्यक उपयोग नहीं करूंगा .
कचरा डस्टबीन में डालूंगा. दूसरों को भी ऐसा करने के लिए कहूंगा
अपने घर तथा
स्कूल को साफ रखूंगा. प्लास्टिक या पॉलीथिन का उपयोग बिल्कुल नहीं करूंगा.
पशु-पक्षियों के प्रति
दया का भाव रखूंगा. नजदीक के कार्यों के लिए साइकिल का उपयोग करूंगा अथवा पैदल जाऊंगा.
आवश्यकतानुसार कागज का उपयोग करूंगा तथा इसका दुरुपयोग नहीं होने दूंगा.
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