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आपातकाल के 44 साल : …जब फैली अफवाह... कि लालू को लग गयी है गोली

Updated at : 25 Jun 2019 6:13 AM (IST)
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आपातकाल के 44 साल : …जब फैली अफवाह... कि लालू को लग गयी है गोली

पटना : 25 जून की आधी रात से ही बड़े नेताओं की गिरफ्तारी होने लगी थी. पटना विवि छात्र संघ के अध्यक्ष रहे लालू प्रसाद भी पुलिस के निशाने पर थे. अगले दिन ही लालू प्रसाद पटना में गिरफ्तार हो गये. उन्हें पहले फुलवारी जेल में रखा गया. लालू प्रसाद छात्र आंदोलन के अगुवा बन […]

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पटना : 25 जून की आधी रात से ही बड़े नेताओं की गिरफ्तारी होने लगी थी. पटना विवि छात्र संघ के अध्यक्ष रहे लालू प्रसाद भी पुलिस के निशाने पर थे. अगले दिन ही लालू प्रसाद पटना में गिरफ्तार हो गये. उन्हें पहले फुलवारी जेल में रखा गया. लालू प्रसाद छात्र आंदोलन के अगुवा बन चुके थे. अफवाह भी फैली की लालू प्रसाद पुलिस की गोली के शिकार हो गये. इस अफवाह से लालू प्रसाद पूरे राज्य में चर्चित हो गये.
उन पर मीसा के तहत मुकदमा चला. इसी दौरान उनके घर बेटी का जन्म हुआ, जिसे मीसा का नाम दिया गया. आपातकाल के दौरान जेल मे कैद लालू चर्चा में बने रहे. अखबार पढ़ने से लेकर पत्र-पत्रिकाओं की डिमांड से उनकी चर्चा होती रही. उन दिनों बोरिंग रोड चौराहा आंदोलनकारियों का अड्डा था. यहां लालू प्रसाद, शिवानंद तिवारी,नरेंद्र सिंह, सुबोधकांत सहाय सरीखे छात्र नेता जुटते और आंदोलन की रूपरेखा तैयार करते. पुलिस की खुफिया टीम इनके पीछे लगी रहती थी.
इसी दौरान लालू प्रसाद की गिरफ्तारी की खबर आयी. छात्र राजनीति से लेकर आपातकाल के दिनों में भी लालू प्रसाद के साथ रहे शिवानंद तिवारी कहते हैं, मैं भी आपातकाल के दौरान जेल में रहा. मेरे साथ कर्पूरी ठाकुर, रूद्र प्रताप सारंगी, गड्डा जी. सच्चिदानंद सिन्हा आदि जेल में थे.
छात्र युवा संघर्ष वाहिनी से जुड़े उन दिनों के आंदोलनकारी अब्दुल बारी सिद्दीकी जैसे युवाओं के लिए 102 डिग्री बुखार से तप रहे युवाओं की दिनभर छिपने की वह जगह थी. रात होते ही किसी दोस्त के घर पनाह मिलती थी. लोहानीपुर इलाके के छोटन सिंह सरीखे युवा भी आपातकाल में सक्रिय थे. उन्होंने हाल तक जेपी सम्मान निधि लेने से मना कर दिया.
आपातकाल के दिनों में हमारा संघर्ष और तरूण क्रांति नाम की दो पत्रिकाएं भी छिपा कर निकाली जाती थीं. समाजवादी चिंतक एसएम जोशी विदेशी अखबार व पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखों को बिहार में अब्दुल बारी सिद्दीकी को भेजते थे, जिसे हमारा संघर्ष पत्रिका में प्रकाशित की जाती थी. राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी और अब्दुन बारी सिद्दीकी से बातचीत आधारित.
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