पटना : अब स्लम की महिलाओं को स्वावलंबी बनायेगा निगम
Updated at : 24 Jun 2019 9:01 AM (IST)
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प्रभात रंजन पटना : राजधानी के स्लम बस्तियों में जगह-जगह गंदगी के ढेर है और यहां रहने वाले लोग मूलभूत सुविधाओं से महरूम है. लेकिन, निगम प्रशासन घरौंदा से घर की ओर अभियान चला रहा है. इस अभियान के तहत स्लम बस्तियों में मूलभूत सुविधाएं मुहैया करायी जा रही है. अब इन बस्तियों की महिलाओं […]
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प्रभात रंजन
पटना : राजधानी के स्लम बस्तियों में जगह-जगह गंदगी के ढेर है और यहां रहने वाले लोग मूलभूत सुविधाओं से महरूम है. लेकिन, निगम प्रशासन घरौंदा से घर की ओर अभियान चला रहा है.
इस अभियान के तहत स्लम बस्तियों में मूलभूत सुविधाएं मुहैया करायी जा रही है. अब इन बस्तियों की महिलाओं को सेल्फ हेल्प ग्रुप (एसएचजी) के जरिये आत्मनिर्भर व स्वावलंबी बनाने की कवायद शुरू की गयी है. ताकि, स्लम में रहने वाले लोगों की जीवन स्तर सुधारा जा सके.
एक हजार एसएचजी बनाने का लक्ष्य : निगम प्रशासन ने स्लम बस्तियों में एक हजार सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है.
नगर आयुक्त अनुपम कुमार सुमन ने इन बस्तियों में काम कर रही संस्था आश्रय अभियान की निदेशिका सिस्टर डोरोथी फर्नांडिस से वार्ता की और एसएचजी बनाने में सहयोग करने की बात कही. संस्था ने नगर आयुक्त को आश्वस्त किया कि शीघ्र ही ग्रुप बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी. संभावना है कि 15 अगस्त से पहले 100 से अधिक ग्रुप बना लिये जायेंगे और यह ग्रुप अपनी-अपनी बस्तियों में काम भी शुरू कर दे.
बैंक से फाइनेंस कराने में मदद करेगा निगम : नगर आयुक्त ने एसएचजी को फाइनेंस करने को लेकर बात कर ली है. इन ग्रुपों को निगम बैंक से फाइनेंस यानी लोन दिलाने में मदद करेगा. साथ ही प्रत्येक ग्रुप का अपना बैंक एकाउंट भी खोलवाया जायेगा. जैसे-जैसे ग्रुप बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी, वैसे-वैसे लोन व एकाउंट खोलने की प्रक्रिया पूरी की जायेगी.
नगर आयुक्त ने बताया कि यह कोई जरूरी नहीं है कि एक स्लम बस्ती में एक ही ग्रुप काम करेगी. बल्कि, एक से अधिक ग्रुप बनाये जायेंगे. एक हजार ग्रुप के जरिये पांच हजार महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य है. यह ग्रुप सिर्फ पत्तल बनाने का काम करेगी.
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