ePaper

न शराबबंदी मुद्दा, न अवैध कारोबार की ही चर्चा

Updated at : 16 May 2019 3:57 AM (IST)
विज्ञापन
न शराबबंदी मुद्दा, न अवैध कारोबार की ही चर्चा

पटना : राज्य में वर्ष 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है. शराबबंदी के बाद से ही राज्य में सत्ता पक्ष इसको अपनी उपलब्धि मानता रहा है. सता के नेता बड़े मंचों से शराबबंदी की लगातार प्रशंसा करते रहे हैं. वहीं राज्य में जदयू के साथ आने के बाद भाजपा के नेता भी इसे बड़ी उपलब्धि […]

विज्ञापन

पटना : राज्य में वर्ष 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है. शराबबंदी के बाद से ही राज्य में सत्ता पक्ष इसको अपनी उपलब्धि मानता रहा है. सता के नेता बड़े मंचों से शराबबंदी की लगातार प्रशंसा करते रहे हैं. वहीं राज्य में जदयू के साथ आने के बाद भाजपा के नेता भी इसे बड़ी उपलब्धि ही मानते रहे हैं.

वहीं राजद की ओर से लगातार राज्य में अवैध शराब के कारोबार होने, बंदी का अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने का हवाला देते रहे हैं. मगर, अब शराबबंदी के बाद लोकसभा चुनाव में कोई भी नेता इसे मुद्दा नहीं बना रहा है. राज्य व केंद्र में सत्ता में रही एनडीए सरकार अपने मंचों से इसकी उतनी चर्चा नहीं कर रही है.
वहीं महागठबंधन के नेता भी इसके विरोध में शराबबंदी के बाद अवैध कारोबार की चर्चा मंच से नहीं कर रहे हैं. कुल मिला कर मसला है कि आखिर इतना बड़ा फैसला इस बार चुनावी मुद्दा क्यों नहीं बन पा रहा है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन