पटना : वकालत का प्रमाणपत्र हर साल देने में क्या कठिनाई
Updated at : 07 Feb 2019 3:40 AM (IST)
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समन्वय समिति को चार सप्ताह का समय पटना : हाइकोर्ट में प्रैक्टिस करनेवाले सभी वकीलों को प्रत्येक साल अपना एओआर नंबर सहित, मोबाइल नंबर, वगैरह की जानकारी देने की बाध्यता के खिलाफ दायर रिट याचिका की सुनवाई बुधवार को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई. मुख्य न्यायाधीश अमरेश्वर प्रताप शाही व न्यायमूर्ति अंजना […]
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समन्वय समिति को चार सप्ताह का समय
पटना : हाइकोर्ट में प्रैक्टिस करनेवाले सभी वकीलों को प्रत्येक साल अपना एओआर नंबर सहित, मोबाइल नंबर, वगैरह की जानकारी देने की बाध्यता के खिलाफ दायर रिट याचिका की सुनवाई बुधवार को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई.
मुख्य न्यायाधीश अमरेश्वर प्रताप शाही व न्यायमूर्ति अंजना मिश्रा की खंडपीठ ने हाइकोर्ट के तीनों अधिवक्ता संघों की समन्वय समिति की ओर से दायर अपील को सुनते हुए समिति को चार सप्ताह का समय देते हुए कहा कि वे इस मामले में इसके व्यावहारिक पहलू पर अपना पक्ष अगली सुनवाई में रखें. मालूम हो कि प्रत्येक वर्ष हाइकोर्ट के वकीलों को अपने एओआर नंबर के साथ इस बात का प्रमाणपत्र देना है कि वे रेगुलर प्रैक्टिस में हैं और कोई भी दूसरा कार्य नहीं कर रहे हैं. यह हाइकोर्ट के एक न्यायाधीश के आदेश के बाद शुरू किया गया है, जिसे हाइकोर्ट प्रशासन ने लागू कर दिया है.
इसी तरह के प्रमाणपत्र को प्रत्येक वर्ष देने में वकील असहजता महसूस कर रहे हैं. वकीलों के इसी व्यावहारिक कठिनाइयों व असहजता के बिंदु पर हाइकोर्ट के तीनों अधिवक्ता संघों की समन्वय समिति को खंडपीठ में अपना पक्ष रखना है कि आखिर उन्हें इस प्रकार के नियम बनाये जाने से क्या-क्या कठिनाइयां हो रही हैं.
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