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2019 में भी बिहार के लोग प्रदूषण की समस्या को भोगते रहेंगे!

Updated at : 01 Jan 2019 7:44 AM (IST)
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2019 में भी बिहार के लोग प्रदूषण की समस्या को भोगते रहेंगे!

दिसंबर में कम से कम 12 मौकों पर 400 के पार गया एयर क्वालिटी इंडेक्स पटना : साल के आखिरी दिन भी पटना का एयर क्वालिटी इंडेक्स चार सौ के पार पहुंच गया. तारामंडल के पास यह आंकड़ा 427 दर्ज किया गया. दिसंबर के महीने में कम से कम 12 बार ऐसी स्थिति आ चुकी […]

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दिसंबर में कम से कम 12 मौकों पर 400 के पार गया एयर क्वालिटी इंडेक्स

पटना : साल के आखिरी दिन भी पटना का एयर क्वालिटी इंडेक्स चार सौ के पार पहुंच गया. तारामंडल के पास यह आंकड़ा 427 दर्ज किया गया. दिसंबर के महीने में कम से कम 12 बार ऐसी स्थिति आ चुकी है. केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड मानता है कि अगर एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 के पार चला जाये तो स्थिति काफी गंभीर है. दिल्ली में ऐसी स्थिति में खुद ब खुद कंस्ट्रक्शन के काम बंद हो जाते हैं, ट्रकों के शहर में प्रवेश पर रोक लग जाती है, जेनेरेटर चलाने पर रोक लग जाती है, ऑड-इवन प्लान शुरू हो जाता है, स्कूल बंद हो जाते हैं और पटाखे चलाने पर रोक लग जाती है. पर राजधानी पटना में जागरूकता के अभाव में यहां लोग इस स्थिति को भी सामान्य मान कर जी रहते हैं.

वाहन जिम्मेदार

पटना शहर में चलने वाले वाहन यहां की आबोहवा को प्रदूषित करने में 16 फीसदी की हिस्सेदारी रखते हैं. इसके अलावा लकड़ी और मिट्टी तेल से जलने वाले चूल्हों से भी प्रदूषण होता है. लगातार चलने वाला कंस्ट्रक्शन वर्क भी यहां की आबोहवा को दूषित कर रहा है. हालांकि एक खुशी की बात यह है कि सरकार ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया है और क्लीन एयर एक्शन प्लान पर काम करने की सहमति बनी है. मगर अभी तक इस पर काम शुरू नहीं हो पाया है.

लैंड लॉक सिचुएशन से बिगड़ते हैं हालात

उद्योगों के कम होने के बावजूद पटना देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से एक है. जानकार बताते हैं कि हिमालय की तलहटी में बसे होने की वजह से पूरे बिहार की स्थिति लैंड-लॉक हो जाती है, जिससे यहां का धूल कण क्या बाहर नहीं जा पाता. ठंड के दिनों में हवा नीचे ही रह जाती है, जिससे स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है.

ऐसे तो स्वस्थ इंसान भी हो सकता है बीमार

पर्यावरण के मसले पर काम करने वाली संस्था सीड की प्रोग्राम ऑफिसर अंकिता ज्योति बताती हैं कि यह सामान्य स्थिति नहीं है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसी स्थिति में कोई भी स्वस्थ इंसान 48 घंटे के अंदर बीमार हो सकता है. बुजुर्गों, बच्चों और मरीजों के लिए तो यह स्थिति काफी खतरनाक हो सकती है. इन दिनों सांस से जुड़ी बीमारियों और दिल के रोगियों की संख्या बढ़ रही है. ऐसी स्थिति में सरकार की तरफ से कम से कम एक एडवाइजरी तो जारी होनी ही चाहिए कि लोग मास्क लगाकर बाहर निकलें, मार्निंग वॉक पर नहीं जायें, बच्चों को बाहर खेलने नहीं भेजें.

स्थिति काफी खराब है, मगर ऐसा नहीं है कि हम 2019 के लिए नाउम्मीद हैं. सरकार ने ही पॉलिथीन पर रोक लगाया है, वन एवं पर्यावरण विभाग के नाम में क्लाइमेट चेंज शब्द जुड़ा है. इसका अर्थ यह है कि सरकार और जनता दोनों इस मुद्दे पर सजग है, इसलिए उम्मीद है कि 2019 में पटना का पर्यावरण बेहतर होगा.
-फादर राबर्ट एथिकल, संस्थापक, तरुमित्र

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