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पटना : आईटी का ‘ककहरा’ सीखेंगे न्यायिक पदाधिकारी

Updated at : 09 Dec 2018 6:09 AM (IST)
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पटना : आईटी का ‘ककहरा’ सीखेंगे न्यायिक पदाधिकारी

सर्वर, ऑडियो-विजुअल, नेटवर्क सिस्टम, कंप्यूटर की बारीकियों से कराया जायेगा रू-ब-रू पटना : सूचना क्रांति के इस दौर से न्यायालय भी अछूते नहीं हैं. अब तो न्यायालयों में भी ऑनलाइन दस्तावेज अपलोड किये जा रहे हैं और बस एक क्लिक पर केस से संबंधित सभी तरह की जानकारी सामने आती है. इसी तरह, काफी पहले […]

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सर्वर, ऑडियो-विजुअल, नेटवर्क सिस्टम, कंप्यूटर की बारीकियों से कराया जायेगा रू-ब-रू
पटना : सूचना क्रांति के इस दौर से न्यायालय भी अछूते नहीं हैं. अब तो न्यायालयों में भी ऑनलाइन दस्तावेज अपलोड किये जा रहे हैं और बस एक क्लिक पर केस से संबंधित सभी तरह की जानकारी सामने आती है. इसी तरह, काफी पहले से ही कोर्ट के ऑर्डर ऑनलाइन उपलब्ध कराये जा रहे हैं. लगातार न्यायिक कार्यों को भी कंप्यूटर आधारित करने का काम चल रहा है.
इसी क्रम में न्यायिक कार्यों से जुड़े स्टाफ को सूचना क्रांति की बारीकियों से अवगत कराना भी महत्वपूर्ण काम है. इसी को ध्यान में रखते हुए कंप्यूटर और ऑनलाइन कार्यों से संबंधित काम के बारे में न्यायिक पदाधिकारियों तथा कोर्ट के स्टाफ को बताया जायेगा. इसके लिए प्रशिक्षण की तैयारी है. बिहार न्यायिक अकादमी में इसकी व्यवस्था की जायेगी.
इसके लिए स्टाफ की भर्ती की होगी. गायघाट स्थित बिहार न्यायिक अकादमी में प्रशिक्षण से संबंधित तमाम कार्यों को अंजाम दिया जाता है. 23 अप्रैल को अकादमी के बोर्ड ऑफ गवर्नर की बैठक हुई थी. इसमें एक कंप्यूटर असिस्टेंट कम सिस्टम ऑफिसर (ग्रेड-तीन) तथा दो डाटा इंट्री ऑपरेटर कम सिस्टम असिस्टेंट के पद सृजन किये जाने का निर्णय लिया गया था.
न्यायिक कार्यों में बढ़ा कंप्यूटर का महत्व
इन कर्मचारियों के जिम्मे अकादमी के सर्वर, ऑडियो-विजुअल सिस्टम, नेटवर्क सिस्टम, वीडियो कॉन्फ्रेंस सिस्टम, कंप्यूटर लैब की स्थापना कार्य एवं रखरखाव का काम होगा. यही कर्मचारी न्यायिक पदाधिकारियों व कोर्ट के स्टाफ को प्रशिक्षण में भी मदद करेंगे. दरअसल, पिछले कुछ सालों में न्यायिक कार्यों में कंप्यूटर का महत्व बढ़ गया है.
तमाम डाटा ऑनलाइन किये जा रहे हैं, ताकि एक राज्य से दूसरे राज्य को एक-दूसरे के केस की स्थिति जानने में आसानी हो. वादियों को भी किसी स्तर पर परेशानी नहीं होती है. कार्यालयीय कार्यों को ऑनलाइन किया जा रहा है. बिहार न्यायिक अकादमी के निदेशक से इस संबंध में प्रस्ताव विधि विभाग को भेजा था, जिसे कैबिनेट ने भी मंजूरी दे दी है.
अब अकादमी में आईटी से संबंधित कार्यों को गति तो मिलेगी ही, कोर्ट से संबंधित स्टाफ को प्रशिक्षित करने में भी आसान होगी. साथ ही, कंप्यूटराइजेशन के काम को तेज किया जा सकेगा, जिससे न्यायिक गतिविधियों को और बेहतर किया जा सकेगा.
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