वाल्मीकि अभयारण्य की 5400 एकड़ भूमि पर नेपाल का कब्जा
Updated at : 02 Dec 2018 3:19 AM (IST)
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पटना : वाल्मीकि वन अभयारण्य की 5400 एकड़ भूमि पर नेपाल का कब्जा हो चुका है. सूचना का अधिकार कानून के तहत प्राप्त सूचना को आधार बनाते हुए सामाजिक कार्यकर्ता गुड्डू बाबा ने शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वन संरक्षक-सह-क्षेत्र निदेशक, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, बेतिया के द्वारा उपलब्ध करायी गयी जानकारी के […]
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पटना : वाल्मीकि वन अभयारण्य की 5400 एकड़ भूमि पर नेपाल का कब्जा हो चुका है. सूचना का अधिकार कानून के तहत प्राप्त सूचना को आधार बनाते हुए सामाजिक कार्यकर्ता गुड्डू बाबा ने शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वन संरक्षक-सह-क्षेत्र निदेशक, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, बेतिया के द्वारा उपलब्ध करायी गयी जानकारी के अनुसार वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल 901 वर्ग किमी बताया गया है, जिसमें से लगभग 5478 एकड़ भूमि अतिक्रमित है. अतिक्रमित भूमि का बड़ा हिस्सा सुस्ता चकदहवा में है.
बोर्डर पर स्थित यह 5400 एकड़ भूमि भारत नेपाल के अंतरराष्ट्रीय सीमा विवाद के दायरे में है. शेष 78 एकड़ भूमि स्थानीय व्यक्तियों की ओर से अतिक्रमित है. गुड्डू बाबा की ओर से दायर आरटीआई में इस बात की जानकारी भी दी गयी है कि सुस्ता चकदहवा के अतिक्रमित भूमि को मुक्त करवाने के लिए समय-समय पर जिला प्रशासन, राजस्व विभाग व उच्चाधिकारियों को वस्तु स्थिति से अवगत कराया गया है.
गुड्डू बाबा ने कहा कि इस संबंध में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री समेत वरीय अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है. अब तक मामले में दिखी प्रशासनिक उदासीनता के कारण वन भूमि को बचाने के लिए गुड्डु बाबा ने खुद आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दल वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में जाकर सम्मेलन कर रहे हैं. लेकिन, किसी का इस अतिक्रमण पर ध्यान नहीं है. ऐसा नहीं होने पर अगले शनिवार को वे मामले में एकदिवसीय धरना देंगे और उसके बाद अपने लोगों से विचार-विमर्श कर आगे की कार्रवाई तय करेंगे.
एक अपराधी ने क्षेत्र पर कर लिया था कब्जा
गुड्डू बाबा ने बताया कि पिछले दिनों वे वाल्मीकि अभयारण्य के भ्रमण पर गये थे. इस दौरान स्थानीय लोगों ने उन्हें यह जानकारी दी. लोगों ने बताया कि 1990 के दशक में मुन्ना खान नामक एक अपराधी ने सुस्ता की 5400 एकड़ वन भूमि पर कब्जा कर लिया था. बाद में उसने नेपाल की नागरिकता ले ली और उसके पीछे नेपाल की सरकार खड़ी हो गयी. इसके कारण सुस्ता जो कभी बिहार का था, अब नेपाल का हो चुका है.
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