पटना : छात्रों को भी अनुभवी शिक्षक के रूप में मिल पायेंगे गाइड
Author Prabhat khabar digital desk
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पटना : रिटायर्ड शिक्षक भी अब पीएचडी करा पायेंगे. पहले भी रिटायर शिक्षकों को यह अधिकार था, लेकिन 2016 के रेगुलेशन के लागू होने के बाद इस पर रोक लगा दी गयी. मगर पिछले दो साल के अनुभवों से यह देखा गया कि शिक्षकों की कमी की वजह से बड़ी संख्या में छात्र पीएचडी से […]
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पटना : रिटायर्ड शिक्षक भी अब पीएचडी करा पायेंगे. पहले भी रिटायर शिक्षकों को यह अधिकार था, लेकिन 2016 के रेगुलेशन के लागू होने के बाद इस पर रोक लगा दी गयी.
मगर पिछले दो साल के अनुभवों से यह देखा गया कि शिक्षकों की कमी की वजह से बड़ी संख्या में छात्र पीएचडी से वंचित रह जा रहे हैं. इसी वजह से रिटायर्ड शिक्षकों के पीएचडी नहीं कराने के नियम को वापस ले लिया गया है. रिटायर्ड शिक्षकों के पीएचडी कराने से उच्च शिक्षा में रिसर्च की गुणवत्ता बढ़ेगी.
इसलिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने रिटायर्ड शिक्षकों को भी रिसर्च सिस्टम में शामिल करने की कवायद शुरू कर दी है. इसके तहत 70 वर्ष की आयु तक के शिक्षक पीएचडी करा सकेंगे. इस पर कुलपतियों की बैठक में सहमति भी बन गयी है.
ऑटोमेशन के लिए फ्री सॉफ्टवेयर टेंपलेट : प्रशासनिक सहूलियत व ऑटोमेशन के लिए यूजीसी सभी विश्वविद्यालयों को मुफ्त में सॉफ्टवेयर टेम्पलेट भी उपलब्ध करायेगा. यह सॉफ्टवेयर आईआईटी खड़गपुर से लिया जायेगा लेकिन विश्वविद्यालय और कॉलेजों को अपने नियम-परिनियम के मुताबिक इसमें बदलाव करने की छूट होगी.
अगले छह महीनों में यूजीसी ने इस व्यवस्था को सभी विश्वविद्यालयों में स्थापित करने का निर्देश कुलपतियों को दिया है.सॉफ्टवेयर से गड़बड़ियों को रोकने में मिलेगी मदद : रिसर्च के लिए एंटी प्लेगारिज्म सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध होने वाला है जो गड़बड़ियों को रोकने में सहायक होगा. छात्र नकल नहीं कर पायेंगे और करेंगे तो पकड़े जायेंगे. उनकी थेसिस को यूजीसी रद्द भी कर सकती है.
इस तरह छात्र मौलिक शोध कार्य के लिए बाध्य होंगे. बीएन काॅलेज के प्राचार्य प्रो राजकिशोर प्रसाद ने कहा कि इससे शोध कार्य अधिक गुणवत्तापूर्ण होगा. वहीं गलत तरीके से होने वाली पीएचडी पर रोक लगेगी. वास्तविक शोध को बढ़ावा मिलेगा.
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