श्रेष्ठ साहित्य बढ़ाता है समझ और सहिष्णुता
Author Prabhat khabar digital desk
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पटना : श्रेष्ठ साहित्य से जमाने के बारे में जागरूकता बढ़ जाती है. इससे आपसी समझ, स्वीकृति, सहिष्णुता, सहयोग और शांति को बढ़ावा मिलता है. हम लगभग 64 सालों से देश में बौद्धिक एकता के लिए एक सेतु बनाने का काम कर रहे हैं. देश में शांति और सद्भाव कायम करने के लिए अकादमी का […]
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पटना : श्रेष्ठ साहित्य से जमाने के बारे में जागरूकता बढ़ जाती है. इससे आपसी समझ, स्वीकृति, सहिष्णुता, सहयोग और शांति को बढ़ावा मिलता है. हम लगभग 64 सालों से देश में बौद्धिक एकता के लिए एक सेतु बनाने का काम कर रहे हैं. देश में शांति और सद्भाव कायम करने के लिए अकादमी का यह प्रयास भले ही छोटा है लेकिन प्रभावी है. अभी हम 24 भारतीय भाषाओं में साहित्य प्रकाशित करते हैं.
अरविंद महिला कॉलेज सभागार में उत्तर पूर्वी और उत्तर क्षेत्रीय लेखक सम्मिलन में ये बातें प्रतिष्ठित हिंदी कवि और साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने कही. साहित्य अकादमी के सचिव के. श्री निवासन ने अपने भाषण में सभी उपस्थित अतिथि साहित्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गुलाब चंद राम जायसवाल, विशिष्ट अतिथि प्रख्यात सानु लामा (नेपाली) अकादमी के सामान्य परिषद के सदस्य प्रो. अमरनाथ सिन्हा, अरविंद महिला कॉलेज की प्रधानाचार्य प्रो. पूनम चौधरी और कार्यक्रम के संयोजक डॉ. शिवनारायण आदि को अकादमी की पुस्तकें भेंट की. उन्होंने कहा कि अकादमी ने कुछ दिनों से ये परंपरा सुख चुकी है.
आरंभिक वक्तव्य अमरनाथ सिन्हा ने देते हुए कहा कि भारत जितना विविधताओं का देश है. उतने ही वह एकात्म देशभक्ति वाला भी देश हैं. उन्हाेंने कहा कि कुछ देश की दूरी पर भाषाएं बदल जाती है विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न भाषाएं हैं ये भाषाएं आती कहां से है. बुनियादी तौर पर सारी भाषाएं मूलत: विशेष क्षेत्रों में अर्थात विशेष क्षेत्र परिस्थितियों यानि वातावरण स्थिति अवस्थाएं वाले लोग एक साथ कई आविष्कार करे हैं. विश्वनाथ प्रसाद ने लिपि पर सवाल उठाया.
उन्होंने कहा कि लिपि पर जोर देने से हिंदी का विकास नहीं होगा हमें इसके साथ ही सुनने की प्रकृति पर भी बल देना होगा. उन्होंने कहा कि पहले के जमाने में साधु-संतों को लोग सुनते थे और गुनते थे. सानु लामा ने समारोह में सम्मिलित होने के लिए आभार प्रकट करते हुए अपनी हिंदी भाषा की अनभिज्ञता के प्रति खेद प्रकट की. उन्होंने हिंदी भाषा को एक खूबसूरत भाषा बताया. गुलाब चंद राम जायसवाल ने सानू लामा को विशेष धन्यवाद दिया. उन्होंने प्रो. सत्यनारायण को, जो राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित है, विशेष धन्यवाद दिया साथ ही प्रभारी प्रधानाचार्य पूनम चौधरी के जल्द सेवानिवृत्त होने पर खेद व्यक्त किया.
अमरनाथ सिन्हा ने ब्रजभाषा, अवधि, मैथली, मगही, भोजपुरी, गढ़वाली, कुमायूं, कौरवी, मराठी, मेवाडी इत्यादि को एक मंच पर लाने का लेकर आयोजकों की सराहना की. उन्होंने कहा कि इनमें एक बोली ब्रजभाषा है जो बाद में अन्य बोलियों के पीछे छोड़ते हुए प्रमुख भाषा बन गयी. उनके पीछे दो कारण एक यह कि आगरा में जहां ब्रज भाषा बोली जाती थी, वह कभी हिंदुस्तान की राजधानी हुआ करती थी.
इसलिए, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों के प्रति रुझान के कारण ब्रजभाषा महत्वपूर्ण हो गयी दूसरी उस जमाने के जितने बड़े कवि हो चाहे कबीर हो या जायसी उन्होंने ब्रजभाषा में जरूर रचना की.देवेंद्र कुमार देवेंद्र के द्वारा मुख्य अतिथि प्रो विश्वनाथ प्रसाद तिवारी के साथ ही सभाध्यक्ष पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. गुलाब चंद राम जायसवाल विशिष्ट अतिथि प्रख्यात कवि सानु लाला नेपाली जी, अरविंद महिला कॉलेज की प्राधानाचार्य प्रो पूनम चौधरी, कार्यक्रम के संयोजक डॉ शिवनारायण जी का परिचय दिया गया.
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