बिहार में अब महज एफआइआर से नहीं बिगड़ेगा आपका चरित्र, विरोध प्रदर्शन या सड़क जाम किया तो नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 03 Feb 2021 6:20 AM
मुख्यालय ने निर्देश दिये है कि पुलिस द्वारा किसी भी व्यक्ति के संबंध में समर्पित सत्यापन प्रतिवेदन अत्यंत ही संवेदनशील दस्तावेज है. इसे बिना अनावश्यक विलंब के आवेदक को परेशान किये बगैर सही-सही तैयार किया जाना आवश्यक है.
पटना. गृह विभाग के आदेश के आलोक में मंगलवार को पुलिस मुख्यालय ने एक आदेश जारी कर चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन को लेकर जिला पुलिस की ओर से की जाने वाली कार्रवाई को स्पष्ट किया है.
मुख्यालय ने निर्देश दिये है कि पुलिस द्वारा किसी भी व्यक्ति के संबंध में समर्पित सत्यापन प्रतिवेदन अत्यंत ही संवेदनशील दस्तावेज है. इसे बिना अनावश्यक विलंब के आवेदक को परेशान किये बगैर सही-सही तैयार किया जाना आवश्यक है.
आदेश में किन-किन मामलों में चरित्र सत्यापन की जरूरत होगी है. इसे भी स्पष्ट कर दिया गया है. आदेश में कहा गया है कि संज्ञेय अपराधों के संबंध में यदि कोई व्यक्ति प्राथमिक या अप्राथमिकी अभियुक्त रहा हो, लेकिन जांच के बाद आरोपपत्रित नहीं किया गया हो तो सत्यापन प्रतिवेदन में कोई टिप्पणी नहीं की जायेगी. साथ ही संदिग्ध घोषित किये गये व्यक्ति पर भी टिप्पणी नहीं की जायेगी.
मतलब साफ है कि पुलिस केवल एफआइआर में नाम होने से किसी का चरित्र नहीं बिगाड़ पायेगी. इसके अलावा न्यायालय द्वारा किसी आरोपपत्रित व्यक्ति के विरुद्ध यदि संज्ञान नहीं लिया जाये अथवा किसी चरण में मुकदमा खारिज कर दिया जाये या विचार के बाद दोषमुक्त कर दिया जाये तो चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन में उसकी प्रविष्टि नहीं होगी.
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1. विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों व निकायों में संविदा, ठेका पर काम.
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2. सरकारी सेवा में स्थायी अनुबंध के आधार पर नौकरी करने वाले पर.
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3. शस्त्र लाइसेंस.
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4. पासपोर्ट के लिए आवेदन के लिए.
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5. चरित्र प्रमाण पत्र निर्गत करना.
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6. सार्वजनिक उपक्रमों में संबंधित विभिन्न प्रकार के लाइसेंस पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी के लिए लाइसेंस.
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7. किसी भी प्रकार के सरकारी सहायता प्राप्त करने वाले एनजीओ, संस्था में ऐसे व्यक्ति के पदधारक होने पर सरकारी सहायता या कांट्रेक्ट दिये जाने पर.
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8. बैंक अथवा सरकारी संस्थानों से कर्ज लेने पर.
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9. अन्य कोई कार्य जिसके लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा पुलिस सत्यापन की जरूरत पर.
मुख्यालय ने आदेश में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति किसी विधि-व्यवस्था की स्थिति, विरोध प्रदर्शन, सड़क जाम आदि मामलों में संलिप्त होकर किसी आपराधिक कृत्य में शामिल होता है और उसे इस कार्य के लिए पुलिस द्वारा आरोपपत्रित किया जाता है तो इस संबंध में चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन में विशिष्ट एवं स्पष्ट रूप से लिया जायेगा. ऐसे व्यक्तियों को गंभीर परिणामों के लिए तैयार रखना होगा और उसे सरकारी नौकरी, सरकारी ठेका आदि नहीं मिल पायेंगे.
दरअसल, बीते 25 जनवरी को गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव ने डीजीपी और सभी विभागों के साथ प्रमंडलीय आयुक्त व डीएम को पत्र जारी कर कहा था कि विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों, निकायों में संविदा या ठेका पर काम लेने के लिए चरित्र सत्यापन की अनिवार्यता होगी. इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया कि नौ मामलों में पुलिस सत्यापन प्रतिवेदन की आवश्यकता है.
पुलिस सत्यापन में मात्र संज्ञेय अपराध में संलिप्तता एवं उस क्रम में पुलिस एवं न्यायालय द्वारा की गयी कार्रवाई को प्रविष्ट किया जायेगा. लंबित पुलिस कार्रवाई-किसी संज्ञेय अपराध में प्राथमिकी में प्राथमिकी व अप्राथमिकी अभियुक्त, आरोपपत्रित, न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध के बार में तथ्यों को अंकित किया जायेगा.
पुलिस सत्यापन प्रतिवेदन तैयार करने के लिए संबंधित थाना द्वारा सभी अभिलेखों का अध्ययन किया जायेगा. किसी भी परिस्थिति में सत्यापन प्रतिवेदन पूर्ण और सही-सही होना चाहिए. यह संबंधित थानाध्यक्ष की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी. एक से अधिक जिला में रहने वाले व्यक्तिगत व आपराधिक गतिविधियों के बारे में सभी संबंधित जिलों में सूचना प्राप्त की जायेगी. वर्तमान व स्थायी पता, कारा निदेशालय के आंकड़ों की जानकारी भी पुलिस को देनी होगी.
Posted by Ashish Jha
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