बिहारशरीफ : पांडवों के साथ रथ पर आये थे कान्हा, आज भी हैं रथचक्र के निशान

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बिहारशरीफ : हर तरफ श्रीकृष्ष्ण जन्माष्टमी की धूम है, ऐसे में बिहार और राजगीरवासियों में भी खासा उत्साह है. मान्यता है कि जरासंध का वध करने के लिए भगवान श्रीकृष्ष्ण रथ पर सवार होकर पांडवों के साथ राजगीर आये थे. आज भी उनके रथचक्र के निशान यहां मौजूद हैं, जो श्रद्धालुओं और सैलानियों के लिए […]

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बिहारशरीफ : हर तरफ श्रीकृष्ष्ण जन्माष्टमी की धूम है, ऐसे में बिहार और राजगीरवासियों में भी खासा उत्साह है. मान्यता है कि जरासंध का वध करने के लिए भगवान श्रीकृष्ष्ण रथ पर सवार होकर पांडवों के साथ राजगीर आये थे. आज भी उनके रथचक्र के निशान यहां मौजूद हैं, जो श्रद्धालुओं और सैलानियों के लिए आस्था और आकर्षण का केंद्र है.
कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण मगध सम्राट जरासंध के कृत्यों से नाराज होकर उसका वध करना चाहते थे. राजा जरासंध मल्लयुद्ध का बड़ा शौकीन था. मल्लयुद्ध द्वारा ही राजा जरासंध का वध करने के उद्देश्य से भगवान श्रीकृष्ण पांडवों के साथ रथ पर सवार होकर राजगीर पहुंचे थे. जिस जगह उनका रथ उतरा था, वहां रथ के चक्के का निशान बन गया था. आज भी तीसरा पहाड़ के नीचे श्रीकृष्ण के रथचक्र का निशान है.
इसी जगह पर पहली बार भीम से मल्लयुद्ध भी हुआ था. मल्लयुद्ध के दौरान धरती पर गिरने, टेहुना, केहुनी व पैरों के निशान भी मौजूद हैं. भीम के साथ यहां कई दिनों तक मल्लयुद्ध हुआ था. कोई नतीजा नहीं निकलने पर जरासंध के अखाड़े पर फिर दोनों में मल्लयुद्ध हुआ था. राजा जरासंध महाबली, शक्तिशाली, महाबलवान योद्धा था, उसे हराना भीम के लिए मुश्किल भरा था. अंत में भगवान श्रीकृष्ण ने राजा जरासंध के जन्म और महाबली होने की पूरी कहानी जानी.
तब एक दिन जरासंध और भीम के बीच हो रहे मल्लयुद्ध के दौरान एक लकड़ी के तिनके को बीच में फाड़ कर अलग-अलग दिशाओं में फेंक कर श्रीकृष्ण ने भीम को इशारा किया. इस इशारे के बाद भीम ने राजा जरासंध के शरीर को दो हिस्सों में चीर कर अलग-अलग दिशाओं में फेंक दिया, तब जरासंध की मृत्यु हुई थी.
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