मुंगेर में एक महीने की योग साधना पूरी, अब व्यस्त लोगों के लिए भी आसान होगा योग; जानें क्या है ‘योग कैप्सूल’

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योग साधना शिविर में योगाभ्यास करते श्रद्धालु. | Prabhat Khabar Network

मुंगेर में श्रावणी योग साधना का एक माह का शिविर संपन्न हुआ. समापन सत्र में 'योग कैप्सूल' की नई विधि प्रस्तुत की गई, जो कम समय में योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने में मदद करेगी.

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योग नगरी मुंगेर के संन्यास पीठ स्थित पादुका दर्शन परिसर में चातुर्मास के अवसर पर चल रही एक माह की श्रावणी योग साधना का शुक्रवार को समापन हुआ. बिहार योग विद्यालय के प्रशिक्षकों के निर्देशन में आयोजित इस साधना में नगर के लोगों ने नियमित रूप से योगासन, प्राणायाम, मंत्र साधना, ध्यान और शिथिलीकरण का अभ्यास किया. समापन सत्र में खास तौर पर ‘योग कैप्सूल’ का अभ्यास कराया गया, ताकि कम समय में भी लोग योग को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना सकें.

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आखिर क्या है ‘योग कैप्सूल’?

योग साधना शिविर में योगाभ्यास करते श्रद्धालु.
योग साधना शिविर में योगाभ्यास करते श्रद्धालु.

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग योग करना चाहते हैं, लेकिन समय की कमी के कारण नियमित अभ्यास नहीं कर पाते. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए समापन दिवस पर योग कैप्सूल का अभ्यास कराया गया.

बिहार योग विद्यालय की पद्धति में योग कैप्सूल योगाभ्यास का संक्षिप्त रूप है. इसकी शुरुआत मंत्र साधना से होती है. इसके बाद कम समय में आवश्यक योगासन, प्राणायाम और विश्राम का अभ्यास कराया जाता है. इसका उद्देश्य योग को लंबी और कठिन प्रक्रिया के बजाय व्यस्त दिनचर्या में सहज रूप से शामिल करना है.

मंत्रों के पाठ से शुरू हुआ अंतिम सत्र

श्रावणी योग साधना के अंतिम दिन कार्यक्रम की शुरुआत महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र और मां दुर्गा के 32 नामों के पाठ से हुई. इसके बाद साधकों ने ताड़ासन, त्रियक ताड़ासन, कटिचक्रासन और सूर्य नमस्कार का अभ्यास किया.

साधकों को विपरीतकरणी, भुजंगासन, नाड़ी शोधन प्राणायाम और भ्रामरी प्राणायाम भी कराया गया. इसके बाद शिथिलीकरण और योगनिद्रा का अभ्यास कराया गया. समापन दिवस पर योग कैप्सूल का विशेष अभ्यास कराया गया. योगाभ्यास का संचालन बुद्धिचैतन्य ने किया.

योग सिर्फ शिविर तक सीमित न रहे

समापन अवसर पर स्वामी शिवध्यानम ने कहा कि एक माह की साधना का उद्देश्य योग को केवल शिविर या विशेष कार्यक्रम तक सीमित रखना नहीं है. साधकों को प्रशिक्षण के दौरान सीखे गये अभ्यासों को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि योग की वास्तविक शक्ति नियमित और निरंतर अभ्यास में है. इसे जीवनशैली का हिस्सा बनाकर ही इसके लाभों को स्थायी रूप से अनुभव किया जा सकता है.

सुबह योग, दोपहर में मंत्र साधना

श्रावणी योग साधना के दौरान प्रतिदिन सुबह नियमित योगाभ्यास का सत्र आयोजित किया गया. इसके साथ अपराह्न में श्रावणी मंत्र साधना भी हुई. साधकों को योगासन और प्राणायाम के साथ ध्यान, शिथिलीकरण और योगनिद्रा का अभ्यास कराया गया.

कार्यक्रम का उद्देश्य केवल शारीरिक अभ्यास कराना नहीं, बल्कि योग के माध्यम से मानसिक संतुलन, एकाग्रता और अनुशासन की आदत विकसित करना भी रहा.

गुरु पूर्णिमा के बाद शुरू हुई थी साधना

पादुका दर्शन परिसर में गुरु पूर्णिमा के दूसरे दिन से एक माह के लिए श्रावणी योग साधना का आयोजन किया जाता है. इस दौरान मुंगेर नगरवासियों के लिए नियमित योगाभ्यास की व्यवस्था रहती है.

एक माह के अभ्यास के बाद शुक्रवार को साधना का समापन हुआ. प्रशिक्षकों ने साधकों से अपील की कि वे शिविर समाप्त होने के साथ योग को न छोड़ें, बल्कि सीखे गये अभ्यासों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में जारी रखें.

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