डीजल फूंककर बचाई फसल, अब खाद के लिए लूटे जा रहे किसान! मुंगेर के संग्रामपुर में सरकारी रेट को ठेंगा दिखा रहे दुकानदार; जानें पूरा सच

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फोटो- खेत में लगे धान का फसल | Prabhat Khabar Network

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मुंगेर के किसानों को डीएपी और यूरिया खाद की ऊंची कीमतों से भारी परेशानी हो रही है. दुकानदार सरकारी दर से काफी अधिक कीमत वसूल रहे हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ गई है. किसान आर्थिक दबाव में हैं और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

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मुंगेर, संग्रामपुर. प्रखंड क्षेत्र में डीएपी और यूरिया खाद की कथित ऊंची कीमतों ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. किसानों का आरोप है कि दुकानदार सरकारी निर्धारित दर से काफी अधिक कीमत पर खाद बेच रहे हैं. इससे खेती की लागत बढ़ रही है और किसान आर्थिक दबाव में हैं. किसानों ने खाद की बिक्री में कथित अनियमितता और कालाबाजारी की जांच कराने तथा दोषी विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

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डीएपी 1900 से 2000 और यूरिया 350 रुपये में बेचने का आरोप

किसान शिवशंकर कुमार, रुदल कुमार, शंकर शर्मा, वासुकी सिंह, किरानी मंडल, गणेश पंडित, विपिन सिंह सहित अन्य किसानों ने आरोप लगाया कि प्रखंड क्षेत्र में डीएपी और यूरिया निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बेची जा रही है. किसानों के अनुसार डीएपी के लिए करीब 1900 से 2000 रुपये और यूरिया के लिए करीब 350 रुपये प्रति बोरी तक वसूले जा रहे हैं.

अधिक कीमत देने से इनकार करने पर खाद नहीं देने की शिकायत

किसानों का आरोप है कि कुछ दुकानदार निर्धारित से अधिक कीमत देने से इनकार करने पर खाद देने से मना कर देते हैं. फसल को नुकसान से बचाने के लिए खाद की जरूरत होने के कारण किसान मजबूरी में महंगे दाम पर खाद खरीद रहे हैं. इससे किसानों की लागत लगातार बढ़ रही है.

सरकारी दर और बाजार कीमत में बड़ा अंतर

किसानों ने बताया कि डीएपी की सरकारी दर करीब 1350 रुपये और यूरिया की कीमत करीब 266 रुपये निर्धारित है. इसके बावजूद बाजार में इससे काफी अधिक कीमत वसूले जाने का आरोप लगाया जा रहा है. किसानों का कहना है कि खाद की बिक्री में निर्धारित दर का पालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक शोषण से बचाया जा सके.

कम बारिश के कारण पहले ही बढ़ चुका है सिंचाई खर्च

किसानों ने बताया कि इस वर्ष बारिश की कमी के कारण धान की खेती के लिए बोरिंग से खेतों की सिंचाई करनी पड़ी. खेतों तक पानी पहुंचाने में हजारों रुपये डीजल पर खर्च हुए. अब फसल में खाद डालने का समय आया है तो कथित तौर पर अधिक कीमत पर डीएपी और यूरिया खरीदने से किसानों पर दोहरी आर्थिक मार पड़ रही है.

बढ़ती लागत का खेती पर पड़ रहा असर

किसानों का कहना है कि सिंचाई, डीजल, बीज और खाद समेत खेती की लागत लगातार बढ़ रही है. ऐसे में खाद की कीमत निर्धारित दर से अधिक होने पर खेती करना और मुश्किल हो जाता है. किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से खाद की दुकानों की नियमित जांच कराने की मांग की है.

निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिक्री हुई तो होगी कार्रवाई

प्रखंड कृषि पदाधिकारी अभिनव कुमार ने बताया कि सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य पर ही खाद की बिक्री की जानी है. यदि कोई खाद विक्रेता निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर खाद बेच रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. विभाग की ओर से किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निर्धारित दर पर खाद की बिक्री सुनिश्चित कराने की बात कही गयी है.

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