कारतूस सप्लाई चेन को नहीं तोड़ पा रही पुलिस
Published by : BIRENDRA KUMAR SING Updated At : 05 Jun 2026 5:55 PM
पुलिस कार्रवाई में हथियार तस्कर तो पकड़े जाते हैं, लेकिन उनके पीछे काम कर रहे बड़े सप्लायर अक्सर जांच के दायरे से बाहर नजर आते हैं
– एक वर्ष के दौरान मुंगेर रेंज में बरामद हुए 2822 कारतूस
– मुंगेर जिले में सर्वाधिक 2519 कारतूस व शेखपुरा में सबसे कम 40 कारतूस बरामद
बीरेंद्र कुमार, मुंगेर
मुंगेर रेंज के चार जिलों में पुलिस ने पिछले एक वर्ष के दौरान कुल 322 अवैध हथियार बरामद किया, जबकि 30 मिनी गन फैक्ट्रियों का उद्भेदन किया गया. इस दौरान कुल 2822 कारतूस बरामद किये गये, जिसमें सबसे अधिक कारतूस 2519 सिर्फ मुंगेर जिले में बरामद हुए हैं. यह आंकड़ा बता रहा है कि मुंगेर बरामदगी के मामले में सबसे अव्वल है. लेकिन दूसरा पहलु यह है कि ये कारतूस किस फैक्ट्री, डीलर या सप्लाई नेटवर्क के माध्यम से अपराधियों तक पहुंच रहे हैं. जिसके सप्लाई चेन को पुलिस तोड़ नहीं पा रही.कारतूस सप्लाई चेन को नहीं तोड़ पा रही पुलिस
अवैध हथियार तभी तक खतरनाक नहीं होते, जब तक उनके लिए गोला-बारूद उपलब्ध न हो. असली चुनौती कारतूसों की अवैध आपूर्ति पर रोक लगाने की है. यदि सप्लाई चेन का खुलासा कर उसे ध्वस्त कर दिया जाए, तो हथियार तस्करी पर भी काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है. वहीं आम लोगों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि हर बड़ी बरामदगी के बाद पुलिस हथियारों और फैक्ट्रियों की तस्वीरें तो जारी करती है, लेकिन कारतूसों की उत्पत्ति और उनके नेटवर्क पर शायद ही कोई आधिकारिक जानकारी सामने आती है. अब जबकि मुंगेर रेंज में हजारों कारतूस बरामद होने का रिकॉर्ड सामने आया है, जरूरत इस बात की है कि जांच एजेंसियां केवल हथियार बनाने वालों तक सीमित न रहकर उस अदृश्य नेटवर्क तक पहुंचें, जो अपराधियों के हाथों में गोलियां पहुंचा रहा है. बताया जाता है कि देशी हथियार स्थानीय स्तर पर बनाए जा सकते हैं. लेकिन कारतूस का निर्माण अत्यंत तकनीकी प्रक्रिया है. इसके लिए विशेष धातु, बारूद और प्राइमर की आवश्यकता होती है, जिसका उत्पादन सीमित और नियंत्रित संस्थानों में ही संभव है. ऐसे में सवाल उठता है कि जब अवैध हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों का पर्दाफाश हो रहा है, तो कारतूसों के नेटवर्क तक पुलिस की पहुंच क्यों नहीं बन पा रही?. आंकड़ों पर नजर डालें तो जमुई से 123, लखीसराय से 140 और शेखपुरा से 40 कारतूस बरामद किए गए. हालांकि इन जिलों में भी कारतूसों की सप्लाई चेन का खुलासा नहीं हुआ. पुलिस कार्रवाई में हथियार तस्कर तो पकड़े जाते हैं, लेकिन उनके पीछे काम कर रहे बड़े सप्लायर अक्सर जांच के दायरे से बाहर नजर आते हैं.कहते हैं डीआइजी
डीआइजी राकेश कुमार ने बताया कि इस रेंज में अवैध हथियार के साथ कारतूसों की बरामदगी भी चौकानें वाला है. एक वर्ष में 2822 कारतूस बरामद हुए है, जिसमें 90 प्रतिशत कारतूस सिर्फ मुंगेर जिले में बरामद हुए है. उन्होंने कहा कि सभी एसपी को निर्देश दिया गया कि कारतूस कहां से और कैसे सप्लाई हो रही है. इसकी गहनता से जांच करें और पूरे नेटवर्क को क्रेक करें.
मई 2025 से अप्रैल 2026 तक का आंकड़ा
जिला का नाम बरामद हथियार मिनीगन फैक्ट्री उद्भेदित बरामद कारतूस गिरफ्तार अभियुक्त
मुंगेर 172 26 2519 4657जमुई 63 03 123 5052
लखीसराय 64 01 140 4365शेखपुरा 23 00 40 3658
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