पैर में गंभीर चोट, इलाज के नाम पर गत्ता लपेटकर कर दिया रेफर! मुंगेर सदर अस्पताल की व्यवस्था पर उठे सवाल

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पैर फैक्चर होने पर मरीज के पैर में गत्ता लपेटा | Prabhat Khabar Network

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मुंगेर सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहां एक फ्रैक्चर मरीज को पीओपी की जगह गत्ते में लपेटकर हायर सेंटर रेफर किया गया. यह घटना सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं के दावों की पोल खोलती है.

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Munger Sadar Hospital: सरकार सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का दावा किया जा रहा है. लेकिन मंगलवार को मुंगेर सदर अस्पताल के मॉडल अस्पताल की इमरजेंसी में जो तस्वीर सामने आयी, उसने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिये. सड़क दुर्घटना में घायल होकर पहुंचे एक मरीज का बांया पैर फैक्चर था और दूसरे पैर में भी गंभीर चोट थी. उसे प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर किया गया, लेकिन रेफर करने से पहले उसके पैर को पीओपी या फाइबरग्लास कास्ट से सुरक्षित करने के बजाय गत्ता लपेटकर बैंडेज कर दिया गया.

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मामला मंगलवार दोपहर का है. जमालपुर नयागांव दुर्गा स्थान निवासी नकुल देव पोद्दार सड़क दुर्घटना में घायल हो गये थे. परिजन उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लेकर पहुंचे. जांच के बाद उनके बांये पैर में फैक्चर की स्थिति सामने आयी, जबकि दांये पैर में भी गंभीर चोट थी.

मरीज की स्थिति को देखते हुए चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया. लेकिन इसी दौरान पैर को स्थिर रखने के लिए जिस तरीके का इस्तेमाल किया गया, वह चर्चा का विषय बन गया. स्वास्थ्यकर्मियों ने मरीज के पैर में गत्ता लपेटकर उसके ऊपर बैंडेज कर दिया और उसे हायर सेंटर भेजने की तैयारी की गयी.

पीओपी की जगह गत्ते का सहारा, व्यवस्था पर उठे सवाल

फैक्चर के मरीज के पैर को स्थिर रखना जरूरी माना जाता है, खासकर तब जब उसे दूसरे अस्पताल में रेफर किया जा रहा हो. ऐसे में मरीज के पैर में गत्ता लगाये जाने की तस्वीर सामने आने के बाद सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

मामले ने इसलिए भी लोगों का ध्यान खींचा है, क्योंकि मुंगेर सदर अस्पताल को मॉडल अस्पताल के रूप में विकसित किया गया है. अस्पताल में बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है. ऐसे में गंभीर चोट वाले मरीज को रेफर करने के दौरान गत्ते का इस्तेमाल व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़ा करता है.

हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने गत्ता लगाने की वजह भी बतायी है. अस्पताल उपाधीक्षक के अनुसार यह मरीज के पैर को स्थिर रखने के लिए अस्थायी व्यवस्था थी.

अस्पताल उपाधीक्षक ने बताया क्यों लगाया गया गत्ता

सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ रमन कुमार ने बताया कि पीओपी या फाइबरग्लास कास्ट की व्यवस्था ओटी में होती है. उनके अनुसार मरीज के पैर से अधिक खून निकल रहा था. साथ ही अस्पताल में आर्थो सर्जन उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे हायर सेंटर रेफर किया गया.

उन्होंने बताया कि हायर सेंटर ले जाने के दौरान मरीज का पैर अपनी स्थिति में रहे और अधिक हिले-डुले नहीं, इसके लिए स्वास्थ्यकर्मियों ने अस्थायी रूप से पैर में गत्ता लगाया था.

अस्पताल प्रबंधन की इस सफाई के बाद भी मामला स्वास्थ्य सुविधाओं और इमरजेंसी में उपलब्ध संसाधनों को लेकर सवाल खड़े करता है. खासकर ऐसे समय में जब मॉडल अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध होने का दावा किया जाता है.

Munger Sadar Hospital: आर्थो सर्जन नहीं होने से मरीज को किया गया रेफर

अस्पताल उपाधीक्षक के अनुसार मरीज के पैर से अधिक रक्तस्राव हो रहा था और आर्थो सर्जन उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे हायर सेंटर भेजा गया. ऐसे में इमरजेंसी में गंभीर चोट वाले मरीजों के लिए तत्काल उपलब्ध सुविधाओं और रेफरल व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठना स्वाभाविक है.

मंगलवार की घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि गंभीर फ्रैक्चर और चोट के मामलों में मरीजों को हायर सेंटर भेजने से पहले सदर अस्पताल में कितनी प्रभावी इमरजेंसी ऑर्थोपेडिक सुविधा उपलब्ध है. फिलहाल अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि गत्ता केवल पैर को अस्थायी रूप से स्थिर रखने के लिए लगाया गया था.

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