अरवल में सिविल सर्जन पर हमले के विरोध में मुंगेर सदर अस्पताल की OPD ठप, निराश होकर घर लौटे मरीज

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सदर अस्पताल ओपीडी | Prabhat Khabar Network

मुंगेर सदर अस्पताल.| Prabhat Khabar Network

Doctors Protest : अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन पर हमले के विरोध में मुंगेर सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने OPD सेवा का बहिष्कार किया. इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा.

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Doctors Protest : अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन पर हुए हमले के विरोध में बुधवार को मुंगेर सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने ओपीडी सेवा का पूर्ण बहिष्कार किया. ओपीडी बंद रहने से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा. हालांकि इमरजेंसी, जांच और अन्य आवश्यक सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं.

पांच दिन बाद भी कार्रवाई नहीं होने से चिकित्सकों में नाराजगी

जानकारी के अनुसार अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन पर हुए हमले के पांच दिन बीत जाने के बावजूद आरोपितों के खिलाफ ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने से चिकित्सकों में गहरा आक्रोश है. इसी के विरोध में मुंगेर सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने एकजुट होकर ओपीडी सेवा का बहिष्कार किया.

ओपीडी बंद, लेकिन इमरजेंसी सेवा रही चालू

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. रमन कुमार ने बताया कि अरवल की घटना के विरोध में चिकित्सकों ने ओपीडी सेवा स्थगित रखी है. हालांकि आपातकालीन सेवाओं को प्रभावित नहीं किया गया. इमरजेंसी वार्ड में मरीजों का इलाज सामान्य रूप से जारी रहा. इसके अलावा अस्पताल में जांच, पैथोलॉजी और अन्य जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं भी नियमित रूप से संचालित होती रहीं.

इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को हुई परेशानी

ओपीडी बंद रहने के कारण सुबह से इलाज के लिए पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. कई मरीज घंटों इंतजार करने के बाद बिना इलाज कराए ही वापस लौट गए. खासकर दूर-दराज के क्षेत्रों से आए मरीजों को अधिक परेशानी झेलनी पड़ी.

चिकित्सकों की सुरक्षा का मुद्दा फिर चर्चा में

अरवल की घटना के बाद चिकित्सकों की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है. डॉक्टरों का कहना है कि अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है. उनका मानना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होने से ही भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है और स्वास्थ्य सेवाएं निर्बाध रूप से संचालित रह सकेंगी.


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अमित झा

लेखक के बारे में

By अमित झा

अमित झा प्रिंट माध्यम में 06 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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