दामोदरपुर का चामुंडा काली मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र, तांत्रिक विधि से स्थापना की है मान्यता

Author Pintu Pranav|Edited by System
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प्राचीन काली मंदिर

Chamunda Kali Temple : असरगंज प्रखंड के दामोदरपुर स्थित चामुंडा काली मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. मंगलवार और शनिवार को यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

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असरगंज (मुंगेर) से हिमांशु कुमार सिंह की रिपोर्ट

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Chamunda Kali Temple : मुंगेर जिले के असरगंज प्रखंड अंतर्गत दामोदरपुर गांव स्थित अति प्राचीन चामुंडा काली मंदिर क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक आस्थाओं में शामिल है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर की स्थापना प्राचीन काल में राजा कालीचरण पांडे ने तांत्रिक विधि से कराई थी. मंदिर की ऐतिहासिक बनावट, धार्मिक परंपराएं और वर्षों से चली आ रही पूजा-पद्धति इसे श्रद्धालुओं के लिए विशेष बनाती है.

तांत्रिक विधि से स्थापना की है मान्यता

स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर की स्थापना राजा कालीचरण पांडे ने तांत्रिक विधि से कराई थी. ऐसी भी मान्यता है कि यह मंदिर पशु मुंड पर स्थापित है. श्रद्धालुओं का कहना है कि चामुंडा मां के दरबार से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता और सच्ची श्रद्धा से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है.

36 कोणों वाली अनोखी मंदिर संरचना

Chamunda Kali Temple : मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी वास्तुकला मानी जाती है. स्थानीय लोगों के अनुसार प्राचीन कारीगरों ने 36 कोणों को मिलाकर इस मंदिर का निर्माण किया था और आज भी यह संरचना सुरक्षित है. मंदिर में स्थापित मिट्टी के पिंड को पीतल की कड़ाही से ढंककर रखा जाता है. प्रतिदिन सुबह और शाम सेवक द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है.

मंगलवार और शनिवार को उमड़ती है भीड़

मंगलवार और शनिवार को मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है. इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. स्थानीय परंपरा के अनुसार इन अवसरों पर बलि चढ़ाने की भी प्रथा प्रचलित है. दुर्गा पूजा के दौरान भी यहां विशेष धार्मिक आयोजन और मां चामुंडा की पूजा होती है.

विंध्याचल के स्वरूप से जोड़कर देखते हैं श्रद्धालु

स्थानीय बुजुर्ग मदन मोहन शुक्ला बताते हैं कि श्रद्धालु इस मंदिर को मां विंध्यवासिनी के स्वरूप से भी जोड़कर देखते हैं. उनका कहना है कि मंदिर परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग दर्शन, पूजा और साफ-सफाई के लिए पहुंचते हैं. मंदिर की देखरेख और व्यवस्थाओं का संचालन आज भी कालीचरण पांडे के वंशजों द्वारा किया जा रहा है.

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