मानसिक परेशानी से ज्यादा भारी पड़ रहा सामाजिक कलंक? एमजीसीयू में विशेषज्ञों ने समझाया असर

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कार्यक्रम में शामिल अतिथि

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महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य और इससे जुड़े सामाजिक कलंक पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ. विशेषज्ञों ने पूर्वाग्रहों के प्रभावों पर चर्चा की और समाधान बताए. संगोष्ठी में विद्यार्थियों ने भी भाग लिया.

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Motihari News: महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के काउंसलिंग सेल एवं प्रॉक्टोरियल बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को मानसिक स्वास्थ्य और इससे जुड़े सामाजिक कलंक पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गयी. “मेन्टल हेल्थ स्टिग्मा: साइकोलॉजी काँसेकुएन्सेस एंड इट्स सोशल ओरिजिन्स” विषय पर आयोजित कार्यक्रम महात्मा बुद्ध परिसर स्थित बृहस्पति सभागार में हुआ. संगोष्ठी में मानसिक स्वास्थ्य, मनोवैज्ञानिक लक्षणों और सामाजिक पूर्वाग्रहों के प्रभावों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे.

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मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक पर हुई चर्चा

संगोष्ठी में बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर समाज में मौजूद पूर्वाग्रह और भेदभाव प्रभावित व्यक्तियों की स्थिति को और कठिन बना सकते हैं. विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संवेदनशीलता बढ़ाने और लोगों को समस्या छिपाने के बजाय समय पर सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत बतायी.

समय पर सहायता और सकारात्मक दृष्टिकोण जरूरी

वक्ताओं ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना जरूरी है. किसी व्यक्ति में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े लक्षण दिखाई देने पर समय रहते सहायता और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराने से स्थिति को संभालने में मदद मिल सकती है.

विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य को सामान्य स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए इसके प्रति सकारात्मक सामाजिक दृष्टिकोण विकसित करने पर जोर दिया.

बीएचयू और केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा के विशेषज्ञ शामिल

कार्यक्रम में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञ प्रो. तुषार सिंह और केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा के विषय विशेषज्ञ डॉ. रवि पांडेय शामिल हुए. इनके अलावा प्रो. सुजीत चौधरी और प्रो. पंकज सिंह समेत अन्य विशेषज्ञों एवं वक्ताओं ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे.

विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य के लक्षणों और उनके मनोवैज्ञानिक प्रभावों को समझने के साथ समय रहते सहायता लेने की आवश्यकता पर बल दिया.

परिवार और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण

वक्ताओं ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चुप्पी और सामाजिक कलंक समाप्त करने में परिवार, शैक्षणिक संस्थानों और समाज की सामूहिक भूमिका महत्वपूर्ण है. विद्यार्थियों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करने की जरूरत है, जहां वे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या होने पर बिना झिझक अपनी बात रख सकें.

विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से किया संवाद

संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया. विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों के साथ संवाद किया और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया.

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अधिक संवेदनशील होने तथा जरूरत पड़ने पर समय पर सहायता लेने का संदेश दिया गया.

विश्वविद्यालय के अधिकारी और शिक्षक रहे मौजूद

विश्वविद्यालय की ओर से प्रो. ए.के. सरण, ओएसडी प्रशासन, डॉ. शशि प्रभा, छात्र परामर्शदाता एवं संयोजक, प्रो. सरोज रंजन, प्रो. बिमलेश कुमार, प्रो. पंकज कुमार सिंह, डॉ. अनुपम कुमार वर्मा, डॉ. श्याम बाबू प्रसाद, डॉ. अवनीश कुमार और डॉ. उमेश कुमार समेत अन्य शिक्षक एवं अधिकारी मौजूद रहे.

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