अब अचार, जूस और स्क्वैश से बढ़ेगी किसानों की कमाई, युवाओं को मिलेगा स्वरोजगार

Updated:
विज्ञापन

अचार, जूस, स्क्वैश, डिहाइड्रेटेड चिप्स आदि को प्रदर्शित करते छात्र-छात्राएं

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

Fruit Processing Training Motihari: मोतिहारी के पंडित दीन दयाल उपाध्याय उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय में फल प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के जरिए युवाओं, महिलाओं और किसानों को स्वरोजगार व आय बढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

विज्ञापन

मोतिहारी से सच्चिदानंद सत्यार्थी की रिपोर्ट

विज्ञापन

Fruit Processing Training Motihari: मोतिहारी के पीपराकोठी स्थित पंडित दीन दयाल उपाध्याय उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय में फल प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है. महाविद्यालय का मानना है कि फलों और सब्जियों के प्रसंस्करण से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे.

ये भी पढ़ें: मुजफ्फरपुर सहित पूरे देश में E-Rickshaw बीच सड़क पर क्यों हो रहे हैं बंद? जानिए इसके पीछे की पूरी सच्चाई

कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने की पहल

महाविद्यालय के डीन डॉ. कुंदन किशोर ने बताया कि बागवानी फसलों में कटाई के बाद लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक उपज खराब हो जाती है. ऐसे में फल और सब्जियों का मूल्यवर्धन किसानों को बेहतर बाजार मूल्य दिलाने के साथ-साथ इस नुकसान को भी कम करने का प्रभावी उपाय है.

उन्होंने कहा कि कुलपति के मार्गदर्शन में महाविद्यालय में आधुनिक फल प्रसंस्करण इकाई स्थापित की गई है, जहां छात्रों को मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इससे विद्यार्थियों में कौशल विकास के साथ उद्यमिता की भावना भी विकसित होगी.

अचार से लेकर फ्रूट लेदर तक बनाना सीख रहे छात्र

महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. के. प्रसाद ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान वैज्ञानिक एवं स्वच्छ तकनीकों से आम और अन्य फलों के विभिन्न उत्पाद तैयार करना सिखाया जा रहा है.

प्रशिक्षण में शामिल प्रमुख उत्पाद हैं.

  • आम का अचार
  • जूस
  • स्क्वैश
  • डिहाइड्रेटेड चिप्स
  • फ्रूट लेदर
  • अन्य मूल्यवर्धित खाद्य उत्पाद

इसके साथ ही गुणवत्ता नियंत्रण, स्वच्छता, पैकेजिंग, लेबलिंग, ब्रांडिंग और विपणन की भी जानकारी दी जा रही है, ताकि प्रशिक्षार्थी अपने स्तर पर सफल उद्यम शुरू कर सकें.

प्रभात खबर ग्राफिक्स

ये भी पढ़ें: मोबाइल टावर लगाने की प्रक्रिया तेज, लंबित आवेदनों का निपटारा 30 सितंबर तक अनिवार्य

छोटे स्तर पर भी शुरू कर सकते हैं उद्योग

महाविद्यालय ग्रामीण युवाओं, स्वयं सहायता समूहों और इच्छुक उद्यमियों को तकनीकी मार्गदर्शन देने पर विशेष जोर दे रहा है. उद्देश्य यह है कि कम निवेश में भी छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग स्थापित किए जा सकें और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें.

छात्राओं ने साझा किया अनुभव

प्रशिक्षण में शामिल छात्रा स्नेहा और राम्या ने बताया कि आम का अचार तैयार करने के दौरान उन्हें समझ आया कि प्रसंस्करण के बाद उसी कच्चे आम का बाजार मूल्य दोगुने से भी अधिक हो सकता है.

उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण से उन्हें स्वरोजगार और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में भविष्य की नई संभावनाओं की जानकारी मिली है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार

महाविद्यालय का मानना है कि फल प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन से किसानों की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण और कृषि आधारित उद्यमिता को भी नई गति मिलेगी. संस्थान आने वाले समय में अधिक से अधिक युवाओं और किसानों को इस प्रशिक्षण से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहा है.

ये भी पढ़ें: मैरिज ऐप पर हुई दोस्ती ने बर्बाद कर दी जिंदगी, प्यार, गेमिंग और निवेश के जाल में युवक से 40 लाख की साइबर ठगी

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन