दूर बाजार जाने की होगी मजबूरी खत्म? पूर्वी चंपारण की 112 पंचायतों में बनेंगे हाट-बाजार
सांकेतिक तस्वीर
मोतिहारी में ग्रामीणों को बाजारों पर निर्भरता कम करने के लिए मनरेगा के तहत 32 नए हाट बाजारों को स्वीकृति मिली है. साथ ही, 112 पंचायतों में ऐसे बाजार बनाने की प्रक्रियाधीन है. इससे स्थानीय उत्पादकों को अपने गांव में ही खरीद-बिक्री की सुविधा मिलेगी.
Motihari News: मोतिहारी. गांव के लोगों को अब खरीद-बिक्री के लिए दूर के बाजारों पर निर्भरता कम करने की दिशा में सरकार ने पहल तेज कर दी है. पूर्वी चंपारण में मनरेगा के तहत 32 हाट बाजारों की स्वीकृति दी गयी है, जबकि जिले की 112 पंचायतों में हाट बाजार निर्माण का लक्ष्य प्रक्रियाधीन है. इन बाजारों के निर्माण से ग्रामीणों को अपने गांव और आसपास ही दैनिक जरूरतों तथा कृषि उत्पादों की खरीद-बिक्री की सुविधा मिलने की उम्मीद है.
32 हाट बाजारों की मिली स्वीकृति
जिले में 32 हाट बाजारों के निर्माण की स्वीकृति दी जा चुकी है. इन योजनाओं का शिलान्यास मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा किया जा चुका है. शिलान्यास के बाद संबंधित पंचायतों में निर्माण प्रक्रिया को गति देने का काम शुरू कर दिया गया है.
विभाग की ओर से स्वीकृत हाट बाजारों की निगरानी के लिए पंचायतवार अधिकारियों की तैनाती भी की गयी है, ताकि निर्माण कार्य में किसी स्तर पर लापरवाही नहीं हो.
112 पंचायतों में हाट बाजार बनाने का लक्ष्य
ग्रामीण क्षेत्रों में बाजार की सुविधा बढ़ाने के लिए जिले में कुल 112 हाट बाजारों का लक्ष्य प्रक्रियाधीन है. योजना का उद्देश्य पंचायत स्तर पर ऐसी जगह विकसित करना है, जहां स्थानीय लोग अपने उत्पाद लेकर आ सकें और वहीं उनकी खरीद-बिक्री कर सकें.
इससे ग्रामीणों को छोटे कारोबार और कृषि उत्पादों के लिए दूर के बाजारों तक जाने में लगने वाला समय और अतिरिक्त खर्च कम होने की उम्मीद है.
58 लाख से 2 करोड़ तक का होगा प्रोजेक्ट
हाट बाजारों का निर्माण तीन श्रेणियों में किया जा रहा है. प्रथम श्रेणी के हाट बाजार पर करीब 2 करोड़ रुपये, द्वितीय श्रेणी के बाजार पर 1 करोड़ रुपये और तृतीय श्रेणी के हाट बाजार पर करीब 58 लाख रुपये खर्च करने की योजना है.
स्वीकृत 32 हाट बाजारों पर कुल 8 करोड़ 20 लाख 97 हजार 885 रुपये खर्च होने की जानकारी दी गयी है.
बिजली, शौचालय और पेयजल की मिलेगी सुविधा
डीआरडीए निदेशक डॉ. कुंदन कुमार के अनुसार हाट बाजारों में ग्रामीणों की जरूरत के मुताबिक कई बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी. इनमें बिजली, सब्जी रखने की व्यवस्था, दुकान लगाने के स्थान, शौचालय और पेयजल जैसी सुविधाएं शामिल होंगी.
इन सुविधाओं के विकसित होने से ग्रामीणों के लिए बाजार में खरीद-बिक्री करना अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है.
गांव के उत्पादों की गांव में ही होगी खरीद-बिक्री
हाट बाजार विकसित होने के बाद किसान और ग्रामीण अपने स्थानीय उत्पादों को नजदीकी बाजार में लाकर आसानी से बेच सकेंगे. इससे छोटे स्तर पर कारोबार करने वाले लोगों को भी जगह मिलने की उम्मीद है.
ग्रामीण उत्पादों की स्थानीय स्तर पर खरीद-बिक्री बढ़ने से गांवों की आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है.
निर्धारित समय में पूरा करना है निर्माण कार्य
विभाग के अनुसार स्वीकृत हाट बाजारों का निर्माण कार्य निर्धारित अवधि में पूरा करने का निर्देश दिया गया है. पंचायतवार अधिकारियों की तैनाती के जरिए योजनाओं की निगरानी की जा रही है.
डीआरडीए निदेशक डॉ. कुंदन कुमार ने कहा कि 32 पंचायतों में हाट बाजार निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. कार्य पूरा होने के बाद ग्रामीण उत्पाद बेचने वालों को अपने निकट ही बाजार और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी.
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