गुरु पूर्णिमा पर तीन दिन तक चला धर्म संसद का आयोजन, संतों ने लिए कई अहम संकल्प

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धर्म संसद में शामिल साधु-संत व अन्य. | Prabhat Khabar Network

धर्म संसद में शामिल साधु-संत व अन्य

रक्सौल में आयोजित धर्म संसद में संतों ने गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने और भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की पुरजोर मांग उठाई है।

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Raxaul News: रक्सौल के आश्रम रोड स्थित काली न्यास परिसर में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय धर्म संसद का समापन गुरुवार को हुआ. गुरु नाथ अखाड़ा की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में भारत और नेपाल से बड़ी संख्या में साधु-संत, नागा बाबा और श्रद्धालु शामिल हुए.

कार्यक्रम के दौरान "हर-हर महादेव" और "जय मां काली" के जयघोष से पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा रहा.

धर्म संसद में पारित हुए कई प्रस्ताव

काली मंदिर रक्सौल के पीठाधीश्वर सेवक संजय नाथ के नेतृत्व में आयोजित धर्म संसद में केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण की शुरुआत के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया.

इसके साथ ही उपस्थित संतों ने गौ माता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने और भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग भी रखी.

अखाड़े के लिए सरकारी सुविधाओं की मांग

धर्म संसद में यह भी कहा गया कि गुरु नाथ अखाड़ा बिहार का एकमात्र पंजीकृत साधु अखाड़ा है. इस आधार पर बिहार सरकार से अखाड़े को आवश्यक सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई.

नए पदाधिकारियों की हुई घोषणा

धर्म संसद के दौरान गुरु नाथ अखाड़ा के विभिन्न पदों के लिए संतों को नई जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं.

नेपाल के संत रामसूरत नाथ को मंडलेश्वर बनाया गया. अल्टर बाबा को भारत का सभापति, बुद्धनाथ को महामंत्री और नेपाल के कलैया निवासी नागा बाबा को सेनापति प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई. वहीं गुरु नाथ भोलानाथ को अखाड़े का महंत बनाया गया.

इसके अलावा अखाड़े के 10 अन्य सदस्यों को भी अलग-अलग दायित्व सौंपे गए.

धर्म, सेवा और सनातन परंपरा को मजबूत करने का संकल्प

कार्यक्रम का संचालन सेवक संजय नाथ ने किया. इसमें काली सेना प्रमुख पार्वती तिवारी सहित हजारों श्रद्धालु और भारत-नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों से आए संत मौजूद रहे.

तीन दिनों तक चली धर्म संसद का समापन धर्म स्थापना, सेवा और साधु-संतों के सम्मान के संकल्प के साथ हुआ. कार्यक्रम में शामिल संतों ने सनातन परंपराओं को मजबूत करने और सामाजिक समरसता के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया.


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