‘आपके नाम पर 6.80 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग है’… पुलिस-CBI का डर दिखाकर मोतिहारी के व्यक्ति से ठगे 18.50 लाख

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साइबर ठगी का सांकेतिक तस्वीर

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साइबर ठगों ने पहले मोबाइल नंबर बंद होने का डर दिखाया, फिर दिल्ली पुलिस, बिहार पुलिस और सीबीआई का नाम लेकर 6.80 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग के केस में फंसाने की धमकी दी. इसी डर में एक व्यक्ति ने अपने खाते से 18.50 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए.

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Motihari News: मोतिहारी. पहले मोबाइल नंबर बंद होने का डर, फिर दिल्ली पुलिस के अधिकारी का परिचय, उसके बाद बिहार पुलिस और अंत में सीबीआई का नाम. मनी लॉन्ड्रिंग के केस में फंसाकर गिरफ्तारी की धमकी और खाते में करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन का भय दिखाकर हरसिद्धि थाना क्षेत्र के मेहतालाल टोला निवासी रामाशंकर प्रसाद गुप्ता से कथित साइबर ठगों ने 18.50 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिये. ठगी के बाद भी साइबर ठग उन्हें लगातार संपर्क में रखते रहे और रोज करीब छह घंटे ऑनलाइन मीटिंग व पूछताछ करते रहे. 24 घंटे में रकम वापस करने का भरोसा दिया गया, लेकिन पैसा वापस नहीं आया. इसके बाद पीड़ित को साइबर फ्रॉड का एहसास हुआ और उन्होंने साइबर थाना में शिकायत दर्ज करायी.

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मोबाइल नंबर बंद होने का डर दिखाकर शुरू किया संपर्क

साइबर थाना में दिये आवेदन के अनुसार, 26 अगस्त 2026 की सुबह करीब 8:07 बजे रामाशंकर प्रसाद गुप्ता के मोबाइल पर अनजान नंबर से कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को टेलीफोन विभाग से जुड़ा बताया और कहा कि उनके आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल हो रहा है. इसके बाद उन्हें दूसरे नंबर से संपर्क करने को कहा गया और मामला कथित तौर पर दिल्ली पुलिस तक पहुंचा दिया गया.

6.80 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का भय दिखाया

आवेदन के अनुसार, खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने कहा कि पीड़ित के नाम पर एक बैंक खाता है, जिसमें करीब 6 करोड़ 80 लाख रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है. कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाने के बाद कथित तौर पर पुलिस और सीबीआई अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर वीडियो कॉल पर पूछताछ की गयी. इसी दौरान बैंक खातों की जानकारी लेकर रकम शेयर मार्केट में लगाने का दबाव बनाया गया.

खाते में 18.82 लाख थे, 18.50 लाख करा लिये ट्रांसफर

पीड़ित के अनुसार, उनके खाते में उस समय 18,82,278.20 रुपये थे. कथित ठगों के निर्देश पर 18.50 लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से दूसरे खाते में ट्रांसफर करा लिये गये. आवेदन में जिस खाते का विवरण दिया गया है, वह सिटी यूनियन बैंक की गुन्टूर शाखा से संबंधित बताया गया है. रकम ट्रांसफर कराने के बाद 24 घंटे के भीतर पैसा वापस करने का भरोसा दिया गया.

रोज छह घंटे की ऑनलाइन मीटिंग से बढ़ा शक

रकम ट्रांसफर कराने के बाद भी कथित ठग पीड़ित के संपर्क में बने रहे. आवेदन में बताया गया है कि प्रतिदिन करीब छह घंटे ऑनलाइन मीटिंग कर उन्हें अलग-अलग सुझाव दिये जाते थे. शेयर मार्केट के नाम पर भी लगातार निर्देश दिये जा रहे थे. इसी दौरान पीड़ित को शक हुआ कि वह साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं.

साइबर थाना पुलिस ने शुरू की मामले की जांच

साइबर इंस्पेक्टर मनीष कुमार ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर छानबीन की जा रही है. पुलिस अब कॉल करने वाले लोगों, इस्तेमाल किये गये मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और ट्रांजेक्शन से जुड़े विवरण की जांच कर रही है. साइबर ठगी के इस मामले में आरोपितों तक पहुंचने के लिए पुलिस तकनीकी स्तर पर भी जानकारी जुटा रही है.

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