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मोकामा विधानसभा उपचुनाव के हार-जीत के कारणों को जानिए, इस वजह से 'अनंत किला' फतह करने में चूक गयी बीजेपी

Updated at : 07 Nov 2022 6:39 AM (IST)
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मोकामा विधानसभा उपचुनाव के हार-जीत के कारणों को जानिए, इस वजह से 'अनंत किला' फतह करने में चूक गयी बीजेपी

Mokama assembly by-election: मोकामा विधानसभा सीट को लेकर कहा जाता है कि यहां दो दलों की बीच नहीं बल्कि अनंत सिंह बनाम अन्य के बीच चुनाव होता हैं. शायद यही वजह है कि 2005 से कभी जेल से कभी बाहर रहकर अनंत सिंह वहां से जीतते आए है.

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Mokama assembly by-election: बिहार विधानसभा के दोनों सीटों के चुनाव परिणाम आ गए हैं. गोपालगंज में बीजेपी ने लालू यादव के घर में जीत दर्ज की. जबकि मोकामा में छोटे सरकार यानी अनंत सिंह की पत्नी ने जीत दर्ज की है. मोकामा में आरजेडी प्रत्याशी व अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी 16752 वोटों से विजयी हुई है तो गोपालगंज से बीजेपी की प्रत्याशी व यहां से दिवंगत विधायक सुभाष सिंह की पत्नी कुसुम देवी 2183 वोटों से विजयी हुई है. सियासत के जानकर बीजेपी और राजद के इस जीत के अलग-अलग नजरिये से देख रहे हैं.

अनंत सिंह का जादू मोकामा में फिर से चला

मोकामा विधानसभा सीट को लेकर कहा जाता है कि यहां दो दलों की बीच नहीं बल्कि अनंत बनाम अन्य के बीच चुनाव होते हैं. शायद यही वजह है कि 2005 से कभी जेल से कभी बाहर रहकर अनंत सिंह वहां से जीतते आए है. इस बार अनंत सिंह जेल में इस वजह से उनकी पत्नी नीलम देवी को राजद ने प्रत्याशी बनाया था. इस बार के चुनाव में भी ऐसा प्रतित हो रहा था चुनाव किसी पार्टी के बीच में नहीं, बल्कि दो बाहुबलियों के बीच हो रही थी. अनंत सिंह यहां निर्दलीय भी जीतने की कुबत रखते हैं. बीते तीन दशक से मोकामा में केवल और केवल अनंत सिंह का जादू देखने को मिला है. 2005 से लेकर अभी तक अनंत सिंह विधायक रहे हैं. अब उनकी पत्नी नीलम देवी यहां से विधायक चुनी गईं हैं.

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क्या भूमिहारों ने बीजेपी को नहीं दिया वोट

मोकामा विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां भूमिहारों की आबादी 50 से 60 प्रतिशत तक है. माना जाता है कि भूमिहारों का वोट जिस भी नेता को मिलता है. वह यहां से बड़े आराम से चुनाव जीत जाता है. राजद प्रत्याशी नीलम देवी ने सोनम देवी को 16752 वोटों से हराया है. ऐसे में यह समझा जा सकता है कि बीजेपी को भूमिहारों को पूरा वोट नहीं मिला. राजनीतिक के जानकार बताते हैं कि बीजेपी समर्थकों को उम्मीद थी कि इस बार पार्टी यहां से किसी साफ छवी के नेता को टिकट दे सकती है. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इस वजह से भी बीजेपी की कोर वोटरों ने बीजेपी प्रत्याशी सोनम देवी को वोट नहीं दिया.

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मोकामा में बीजेपी का संगठन न के बराबर

बता दें कि बीजेपी और जेडीयू का जब एनडीए गठबंधन होता था तब ये सीट या तो जेडीयू या फिर लोजपा के कोटे में जाती थी. इस वजह से मोकामा में बीजेपी का संगठन उतना सक्रिय नहीं है. जीतना राजद और जदयू का है. अब बात चिराग पासवान की तो जीत हार के अंतर को देखकर समझा जा सकता है कि यहां चिराग फैक्टर ने काम नहीं किया. हालांकि चिराग पासवान ने खुलकर बीजेपी प्रत्याशी सोनम देवी के पक्ष में वोट मांगा था.

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