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जनता पर महंगाई की मार, एक साल में दवा की कीमतों में 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी

दवा की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. इलाज के खर्च बढ़ गए हैं. दवा खरीदना मजबूरी है. पर, दवा की कीमतें बढ़ने से मध्यम व गरीब वर्ग के लोग काफी परेशान हैं. बीते एक साल में दवा की कीमतों में लगभग 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो गयी है.

By Prabhat Khabar Print Desk
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वा की कीमतों में 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी
वा की कीमतों में 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी
प्रतीकात्मक

दवा की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. इलाज के खर्च बढ़ गए हैं. दवा खरीदना मजबूरी है. पर, दवा की कीमतें बढ़ने से मध्यम व गरीब वर्ग के लोग काफी परेशान हैं. बीते एक साल में दवा की कीमतों में लगभग 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो गयी है. कोरोना काल में न केवल इम्यूनिटी बढ़ाने वाली दवाओं का एक बड़ा बाजार तैयार हुआ बल्कि कई दूसरी जरूरी दवाओं की कीमतें भी तेजी से बढ़ गई. दवा कारोबारियों की माने तो पिछले 1 साल में अधिकतर दवाओं की कीमतें 25 से 30 फीसदी तक बढ़ गई है.

दवाओं के लिए एडवांस बुकिंग होने लगी थी

कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ा तो चिकित्सकों ने लोगों से अपने शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की सलाह दी. इस वजह से इम्यूनिटी बढ़ाने वाली दवाओं की बाजार में बाढ़-सी आ गई. दवा कंपनियों ने इस अवसर का फायदा भी उठाया. विटामिंस, जिंक, आयरन और कैल्शियम की गोलियों की मांग इस कदर बढ़ गयी कि कई दवाओं के लिए एडवांस बुकिंग होने लगी थी.

मटेरियल की कीमतों में वृद्धि भी एक कारण

मधुबनी केमिस्ट एसोसिएशन के सचिव दीपक श्रीवास्तव एवं उपाध्यक्ष ललन राउत ने बताया कि दवा की कीमतों में वृद्धि हुई है. इसका एक कारण चाइना से आने वाले रॉ मटेरियल का नहीं आना, इसके अलावा दूसरे देशों से आने वाले मटेरियल की कीमतों में वृद्धि होना भी एक कारण है. हालांकि कोरोना वायरस के बाद लोग हेल्थ के प्रति सजग हो गए हैं. अब खानपान के साथ पोषण संतुलित आहार व सप्लीमेंट के ऊपर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

जांच की कीमतों में भी बढ़ोतरी

हृदय रोग, टीबी, डायबिटीज एवं हाइपरटेंशन की दवाओं के साथ ही कई प्रकार की जांच की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है. इसके साथ ही अल्ट्रासाउंड, एंजियोग्राफी एवं सिटी स्कैन की कीमतों में भी 25 प्रतिशत के वृद्धि हुई है. पिछले एक साल से बढ़ती महंगाई का ग्राफ तेजी से भाग रहा है. एंटीबायोटिक व एंटी एलर्जी दवाओं की कीमतों में भी 20 फीसदी की वृद्धि पिछले एक साल में हुई है.

दवाओं में 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी

बड़ी कंपनियों ने सभी तरह की दवाओं में 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है. सर्दी खांसी बुखार से लेकर एलर्जी व एनर्जी पर नियंत्रण वाली दवाओं की कीमतें भी 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है. गले में इन्फेक्शन दूर करने वाली जिस टैबलेट की कीमत पहले 50 रुपये होता था उसकी कीमत 75 रुपये हो गई है. इसी प्रकार पेट संबंधी गड़बड़ी दूर करने वाले सिरप पहले 95 रुपये मिलता था. अब इसकी कीमत 115रुपये हो गई है.

विटामिन के प्रति पैकेट पर 10 से 15 रुपये तक की बढ़ोतरी

विटामिन के गोलियों के प्रति पैकेट पर10 रुपये से 15 रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है. बीएन झा कॉलोनी निवासी राजीव कुमार झा ने बताया कि डायबिटीज की दवा ग्लायकोमेट ट्रायो 0.3/2 जो पहले 166 मिलता था उसकी कीमत वर्तमान में 183 रुपये हो गयी है. इतना ही नहीं हाइपरटेंशन की दवा ओलमीट्रैक एच जो पहले 100 रुपये में मिलता था वर्तमान में115 में मिल रहा है.

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