BRICS सम्मेलन में छायी मधुबनी पेंटिंग, संजय झा बोले- मिथिला चित्रकला संस्थान का सपना हो रहा पूरा
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सह सांसद संजय झा | Prabhat Khabar Network
BRICS सम्मेलन में मधुबनी पेंटिंग को मिल रही शानदार प्रतिक्रिया पर जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने खुशी जताई है. उन्होंने कहा कि यह मिथिला की प्राचीन कला और सांस्कृतिक विरासत के लिए गर्व की बात है.
मधुबनी: जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सह सांसद संजय कुमार झा ने ब्रिक्स सम्मेलन में मधुबनी पेंटिंग की लगातार हो रही सराहना पर प्रसन्नता व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि मिथिला की प्राचीन चित्रकला और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए मधुबनी जिले में मिथिला चित्रकला संस्थान की स्थापना के समय जो सपना देखा गया था, वह निरंतर पूरा हो रहा है.
BRICS समिट में विदेशी मेहमानों को भा रही मिथिला की कला
संजय कुमार झा ने कहा कि मिथिलावासियों के लिए यह गौरव का विषय है कि राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय, नई दिल्ली में आयोजित 'मिथिला की लोक परंपरा प्रदर्शनी' ब्रिक्स समिट के दौरान विदेशी मेहमानों के आकर्षण का केंद्र बन रही है.
उन्होंने कहा कि इन पेंटिंग्स में मिथिला के पर्व-त्योहारों, लोक जीवन और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई गयी है. उन्होंने इसे मिथिला की प्राचीन कला और सांस्कृतिक विरासत के लिए गौरव का विषय बताया.
निर्वाचन आयोग ने मांगी 50 मधुबनी पेंटिंग्स
संजय झा ने बताया कि इससे पहले इसी सप्ताह भारत निर्वाचन आयोग ने मिथिला चित्रकला संस्थान, मधुबनी को पत्र भेजकर 50 पेंटिंग्स उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है. निर्वाचन आयोग इन पेंटिंग्स को देश-दुनिया के गणमान्य अतिथियों को भेंट करेगा.
उन्होंने बताया कि भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने 16 अगस्त 2026 को मिथिला हाट, झंझारपुर में एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था. वहां उन्होंने मिथिला चित्रकला संस्थान द्वारा प्रदर्शित मधुबनी पेंटिंग्स का निरीक्षण किया और उसकी सराहना की थी.
108 मीटर लंबी पेंटिंग ने बनाया विश्व रिकॉर्ड
अगस्त 2026 में ही मिथिला चित्रकला संस्थान के कलाकारों ने 108 मीटर लंबी मधुबनी पेंटिंग तैयार कर विश्व रिकॉर्ड बनाया है. दुनिया की इस सबसे लंबी मधुबनी पेंटिंग में रामचरित मानस के 51 प्रमुख प्रसंगों की चित्रमय झांकी प्रस्तुत की गयी है.
संजय कुमार झा ने कहा कि 15 अगस्त 2026 को संस्थान जाकर इस अनूठी पेंटिंग का अवलोकन करना और इसे बनाने वाले कलाकारों को सम्मानित करना उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव रहा.
स्वरोजगार के खुल रहे अवसर
मिथिला चित्रकला संस्थान इच्छुक कलाकारों को मिथिला की पारंपरिक चित्रकला की विभिन्न शैलियों का औपचारिक प्रशिक्षण दे रहा है. इससे कलाकारों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नये रास्ते खुल रहे हैं.
इसके साथ ही संस्थान मधुबनी चित्रकला की मूल शुद्धता, प्रतीकों और पारंपरिक बारीकियों को जीवित रखते हुए देश-दुनिया में इसकी पहचान को और समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान कर रहा है.
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