झंझारपुर: आवारा कुत्तों के फीडर बर्तन पर खर्च हुए 2.50 लाख, उपयोग नहीं होने का आरोप

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प्रतीकात्मक तस्वीर

झंझारपुर नगर परिषद में विकास कार्यों के नाम पर अनियमितता का आरोप लगा है. पूर्व मुख्य पार्षद प्रत्याशी आरती मिश्रा ने आवारा कुत्तों के लिए लगाए गए फीडर बर्तनों पर ढाई लाख रुपये खर्च करने और उनके अनुपयोगी होने पर सवाल उठाए हैं.

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मधुबनी: नगर परिषद झंझारपुर में विकास कार्यों के नाम पर कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए पूर्व मुख्य पार्षद प्रत्याशी आरती मिश्रा और समाजसेवी सह आरटीआई कार्यकर्ता अमित मिश्रा ने संयुक्त प्रेस वार्ता की. दोनों ने नगर परिषद की विभिन्न योजनाओं में खर्च और उपलब्ध करायी जा रही सूचनाओं को लेकर सवाल उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच और पारदर्शिता की मांग की.

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आवारा कुत्तों के लिए लगाये गये फीडर पर ढाई लाख खर्च का दावा

आरती मिश्रा ने कहा कि नगर परिषद ने आवारा कुत्तों के लिए 27 वार्डों में 30 जगहों पर फीडर बर्तन लगाये हैं. उनके अनुसार, इन पर करीब ढाई लाख रुपये खर्च किये गये हैं और एक बर्तन की कीमत आठ हजार रुपये से अधिक है.

उन्होंने आरोप लगाया कि इन बर्तनों में अब तक एक दिन भी कुत्तों को भोजन नहीं कराया गया. उनके अनुसार, कई बर्तन सड़क किनारे धूल और कीचड़ में पड़े हैं. आरती मिश्रा ने सवाल उठाया कि जब भोजन की व्यवस्था ही नहीं करनी थी तो इस मद में करीब ढाई लाख रुपये खर्च करने का क्या औचित्य है.

उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय के आदेश में नसबंदी समेत कई बिंदु शामिल थे, लेकिन नगर परिषद ने इसकी जिम्मेदारी पशुपालन विभाग पर डालकर अपना पल्ला झाड़ लिया.

वार्ड 26 के नाला-सड़क निर्माण पर भी सवाल

अमित मिश्रा ने वार्ड 26 में हुए नाला और सड़क निर्माण कार्य को लेकर भी सवाल उठाये. उन्होंने कहा कि कार्य कराने वाली एजेंसी, एस्टीमेट और नक्शे की जानकारी मांगे जाने के बावजूद नगर परिषद की ओर से टालमटोल की जा रही है.

उनके अनुसार, योजना का नाम उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर गोलमोल जवाब दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े होते हैं.

30 योजनाओं पर 2.75 करोड़ खर्च का दावा

अमित मिश्रा ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभागीय स्तर पर 30 योजनाओं पर कुल 2,75,24,227 रुपये खर्च दिखाये गये हैं. उनका आरोप है कि इन योजनाओं के नाम, संबंधित वार्ड और एजेंसी का विवरण उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है.

आरटीआई के जवाब में सिर्फ कुल राशि बताकर कार्यालय आकर फाइल देखने को कहा गया है. अमित मिश्रा ने इसे सूचना के अधिकार कानून की भावना के अनुरूप नहीं बताया.

दोनों ने नगर परिषद की योजनाओं और खर्च की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा संबंधित सूचनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है.

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