चौठचंद्र पर फल-मिठाई और पकवान से सजी डाली, चंद्र दर्शन के बाद पूरी हुई मिथिला की खास परंपरा
चौठचंद्र की पूजा-अर्चना करती व्रती महिला | Prabhat Khabar Network
मधुबनी में धूमधाम से मनाया गया चौठचंद्र पर्व, जिसे कलंक चौथ भी कहते हैं. महिलाओं ने फल, मिठाई और पकवानों से सजी डाली अर्पित कर संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना की.
मधुबनी: जिलेभर में भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को चौठचंद की पूजा-अर्चना की गयी. इस चतुर्थी को कलंक चौथ के नाम से भी जाना जाता है. मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण भी इस तिथि पर चंद्र दर्शन करने के बाद मिथ्या कलंक के भागी बने थे. मिथिला में चौरचन यानी चौठचंद पर्व को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है.
यह पूजा विशेष रूप से महिलाओं द्वारा की जाती है. पुरुष पंडित के माध्यम से पूजा की रस्म पूरी करायी गयी. पूजा के लिए पूरी, पकवान और 56 भोग तैयार किये गये. इसके बाद चंद्रदेव यानी चंद्रमा को भोग लगाकर अर्पित किया गया.
सादगी और श्रद्धा से मना मिथिला का लोकपर्व
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 14 सितंबर से हुई और इसका समापन 15 सितंबर को होगा. व्रती महिलाओं ने फल, मिठाई और विभिन्न तरह के पकवानों से सजी डाली अर्पित कर निष्ठापूर्वक चौठचंद्र की पूजा-अर्चना की.
पूजा और डाली अर्पण के बाद लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया. प्रसाद ग्रहण करने के साथ ही चौठचंद्र पर्व का समापन हुआ.
मिथिला में सदियों से मान्यता चली आ रही है कि भाद्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को निष्ठा और श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने से संतान की आयु लंबी होती है. साथ ही संतान के सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है.
घर की महिलाओं ने की चौठचंद्र की पूजा
इसी भावना से आज भी घर की बड़ी और बुजुर्ग महिलाएं भादो महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को चौठचंद्र की पूजा-अर्चना कर संतान सहित पूरे परिवार के लिए मंगलकामना करती हैं.
चौठचंद्र पर्व की तैयारी के लिए सुबह ही घर की बुजुर्ग महिलाएं नित्यक्रिया से निवृत्त होकर विभिन्न तरह के पकवान बनाने में जुट गयीं. शाम होते ही पवित्र स्नान कर नये वस्त्र धारण किये और पूजा के लिए बैठीं.
परिवार के सभी सदस्यों ने चंद्रदेव का दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की. व्रती महिलाओं ने आंगन में अरिपन बनाया. इसके बाद नैवेद्य के लिए तैयार पकवान, मिठाई और फल से डाली सजाकर चतुर्थी चंद्र की पूजा-अर्चना की.
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूरी हुई पूजा की रस्म
पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ चौठचंद्र पूजा की रस्म पूरी करायी. पूजा समाप्त होने के बाद प्रसाद का वितरण किया गया. इसके साथ ही चौठचंद्र लोकपर्व का समापन हो गया.
चौठचंद्र पर्व को लेकर सोमवार को जिले में उत्सवी माहौल दिखा. लोगों ने निष्ठापूर्वक पर्व की रस्म पूरी कर उत्साह के साथ चौठचंद्र का पर्व मनाया.
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