जय सियाराम' के जयकारों से गूंज उठा सिंहेश्वर! राम-सीता विवाह के उल्लास के बीच सीता विदाई और वनवास के दृश्य ने रुलाई आंखें
चारों भाइयों की शादी के दौरान | Prabhat Khabar Network
मधेपुरा के सिंहेश्वर में रामलीला का सजीव मंचन हुआ, जिसने भक्ति और लोक संस्कृति का संगम दिखाया. शिवधनुष भंग के उल्लास से लेकर सीता विदाई और वनवास तक के मार्मिक दृश्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया.
Ramlila Singheshwar Madhepura: मधेपुरा जिले के ऐतिहासिक सिंहेश्वर स्थित रामजानकी ठाकुरबाड़ी परिसर में शनिवार की रात भक्ति, लोक संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं का एक ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर श्रद्धालु को भावविभोर कर दिया. गणेश पूजा सह मेला समिति के तत्वावधान में आयोजित गणेश महोत्सव के छठे दिन मधुबनी से पहुंचे कलाकारों ने रामलीला का सजीव और मनोहारी मंचन किया. जब मंच पर भगवान श्रीराम ने शिवधनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाई और धनुष का भंजन हुआ, तो पूरा पंडाल 'जय सियाराम' के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा. लेकिन उल्लास का यह माहौल उस वक्त आंसुओं में बदल गया, जब जानकी की विदाई और राम के वनवास का मार्मिक प्रसंग मंच पर जीवंत हुआ.
पुष्प वाटिका मिलन और शिवधनुष भंग से भक्तिमय हुआ माहौल
रामलीला की शुरुआत भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रथम मिलन के खूबसूरत दृश्य से हुई. गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित पुष्प वाटिका के प्रसंग को मधुबनी के कलाकारों ने मधुर गीत-संगीत और मनमोहक अभिनय के माध्यम से जीवंत कर दिया. इसके बाद मंच पर मिथिलापुरी में आयोजित सीता स्वयंवर का दृश्य दिखाया गया. राजा जनक की प्रतिज्ञा के अनुसार भगवान शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखी गई थी. जैसे ही मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने शिवधनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाई, धनुष भंग हो गया. धनुष टूटते ही ठाकुरबाड़ी परिसर में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने एक स्वर में जयकारे लगाए, जिससे पूरा वातावरण भक्ति के रस में डूब गया.
चारों भाइयों का विवाह और मिथिला की पारंपरिक गारी का आनंद
धनुष भंग के पश्चात राजा दशरथ के पास बारात का संदेश भेजा गया और पूरे विधि-विधान व वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीराम और माता सीता का विवाह संपन्न हुआ. इसके साथ ही लक्ष्मण-उर्मिला, भरत-मांडवी तथा शत्रुघ्न-श्रुतकीर्ति के विवाह का भी मनमोहक मंचन किया गया. चारों भाइयों के एक साथ परिणय सूत्र में बंधने के दौरान विवाह गीतों की गूंज से पंडाल जीवंत हो उठा. इस दौरान मिथिला की समृद्ध लोक संस्कृति की अनुपम झलक देखने को मिली. राम कलेवा के प्रसंग के दौरान मिथिला की महिलाओं ने परंपरा के अनुसार हास्य-व्यंग्य से भरे पारंपरिक गारी गीत प्रस्तुत किए, जिसका दर्शकों ने जमकर आनंद उठाया.
सीता विदाई की मार्मिकता ने नम की श्रद्धालुओं की आंखें
विवाह समारोह के उल्लास के तुरंत बाद जब राजा जनक द्वारा अपनी दुलारी पुत्री सीता की विदाई का दृश्य प्रस्तुत किया गया, तो वहां सन्नाटा पसर गया. पिता और पुत्री के बिछोह के इस अत्यंत मार्मिक और भावुक दृश्य को देखकर पंडाल में उपस्थित कई महिला व पुरुष श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं. कलाकारों के जीवंत अभिनय ने ऐसा समां बांधा कि ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो साक्षात मिथिला से जानकी की विदाई हो रही हो. इसके बाद जब चारों भाई अपनी नववधुओं के साथ अयोध्या पहुंचे, तो एक बार फिर श्रद्धालुओं ने जयकारों से उनका स्वागत किया.
अयोध्या वापसी से वनवास तक का वो प्रसंग, जिससे स्तब्ध रह गया पंडाल
खुशी का यह दौर ज्यादा देर तक नहीं टिक सका और रामलीला की कथा तेजी से अयोध्या में घटित घटनाक्रम की ओर बढ़ी. मंथरा द्वारा माता कैकेयी के कान भरने, कैकेयी द्वारा राजा दशरथ से अपने दो पुराने वरदान मांगने और भगवान राम के लिए १४ वर्ष के वनवास की मांग का अत्यंत मार्मिक मंचन किया गया. अपने प्राणों से प्रिय पुत्र को वनवास की आज्ञा देने के लिए विवश राजा दशरथ की पीड़ा और व्यथा को देखकर दर्शक स्तब्ध रह गए. इस प्रसंग ने वहां मौजूद हर व्यक्ति के हृदय को झकझोर कर रख दिया.
Ramlila Singheshwar Madhepura: आस्था, संस्कृति और लोक परंपरा का अनूठा केंद्र बना सिंहेश्वर
सिंहेश्वर के रामजानकी ठाकुरबाड़ी परिसर में आयोजित यह गणेश महोत्सव, मेला और रामलीला पूरे इलाके में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर रहा है. हर शाम ढलते ही ठाकुरबाड़ी परिसर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है. देर रात तक चलने वाले भक्ति संगीत, संवाद और जयकारों से पूरा सिंहेश्वर क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक रंग में रंगा नजर आता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह के आयोजनों से हमारी आने वाली पीढ़ी को अपनी महान धार्मिक परंपराओं और मिथिला की लोक संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिलता है.

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