रथ पर सजे नन्हे कृष्ण-बलभद्र और कोलकाता का ढोल-नगाड़ा: मुरलीगंज में व्याहुत समाज ने निकाली ऐतिहासिक शोभायात्रा
बलभद्र पूजा के मौके पर निकाली गई शोभायात्रा भाग लेती महिलाएं एवं पुरुष महिलाएं | Prabhat Khabar Network
मुरलीगंज में भगवान बलभद्र पूजनोत्सव धूमधाम से मनाया गया. इस अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पीले परिधान में शामिल हुए. बच्चों की भगवान के रूप में सजी झांकी और कोलकाता की त्रिकाल झांकी विशेष आकर्षण रही.
Madhepura News: बिहार के मधेपुरा जिले स्थित मुरलीगंज की गलियों में रविवार को आस्था और सामाजिक सौहार्द का एक अनोखा नजारा देखने को मिला. जब चारों तरफ पीले वस्त्रों में सजे श्रद्धालुओं का सैलाब उतरा, तो पूरा शहर भक्ति के रंगों से सराबोर हो उठा. व्याहुत पंचायत समिति के तत्वावधान में आयोजित भगवान बलभद्र पूजनोत्सव के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई. गाजे-बाजे और भक्ति गीतों की सुरीली तानों के बीच निकले इस जुलूस ने पूरे मुरलीगंज बाजार को आध्यात्मिक ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया. स्थानीय निवासियों और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं के लिए यह दिन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों और कुलदेवता के प्रति अटूट निष्ठा को दर्शाने का पर्व बन गया.
पीले परिधानों में उमड़ा जनसैलाब, पीली ध्वजाओं से पटा शोभायात्रा मार्ग
पूजनोत्सव की शुरुआत रविवार सुबह व्याहुत पंचायत समिति भवन परिसर में भगवान बलभद्र की प्रतिमा की वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान से स्थापना के साथ हुई. पूजा-अर्चना समाप्त होते ही परिसर से एक ऐतिहासिक शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ. इस शोभायात्रा की सबसे खूबसूरत बात यह रही कि इसमें शामिल अधिकांश पुरुष, महिला और बच्चे पीले परिधानों में नजर आए. हाथों में लहराते पीले ध्वज और भगवान बलभद्र के गगनभेदी जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा. यह शोभायात्रा व्याहुत पंचायत भवन से शुरू होकर गोलबाजार, हाट बाजार, मिड्ल चौक, दुर्गा मंदिर चौक और हरिद्वार चौक से गुजरते हुए पुनः अपने प्रारंभिक स्थल पर पहुंची. रास्ते भर लोग अपने घरों की छतों और दुकानों से शोभायात्रा पर पुष्प वर्षा करते रहे.
कोलकाता की त्रिकाल झांकी और रथ पर सजे नन्हे बाल-गोपाल बने मुख्य आकर्षण
इस धार्मिक जुलूस की भव्यता में चार चांद लगाने का काम कोलकाता से आई त्रिकाल झांकी की टीम ने किया. ढोल-नगाड़ों की गूंज और कलाकारों की जीवंत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सड़क पर खड़े हर दर्शक को मुग्ध कर दिया. इसके साथ ही शोभायात्रा के बीच में चल रहा भव्य रथ आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा. इस रथ पर स्थानीय छोटे-छोटे बच्चों को भगवान बलभद्र और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप में सजाया गया था. बाल-गोपालों के इस मनमोहक रूप को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. भक्ति संगीत की धुनों पर थिरकते श्रद्धालुओं और झांकी की अद्भुत कलाकृतियों ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया.
कुलदेवता की आराधना से सामाजिक एकजुटता का संदेश
बलभद्र पूजनोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने व्याहुत समाज के लोगों को एक सूत्र में पिरोने का काम भी किया. आयोजन के बारे में जानकारी देते हुए व्याहुत पंचायत समिति के अध्यक्ष शिवशंकर भगत ने बताया कि हर वर्ष समाज के कुलदेवता भगवान बलभद्र का पूजनोत्सव अत्यंत हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया जाता है. इस आयोजन की सफलता में समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों और संपूर्ण समाज का अभूतपूर्व योगदान रहता है. उन्होंने आगे कहा कि इस पावन अवसर पर केवल मुरलीगंज ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में स्वजातीय बंधु और श्रद्धालु पहुंचते हैं, जो सामाजिक समरसता की मिसाल प्रस्तुत करता है.
Madhepura News: महाप्रसाद बलभद्र भोज और भक्ति जागरण से गूंजी रात
दिन भर की भव्य शोभायात्रा और पूजा-अर्चना के बाद शाम होते-होते उत्सव का रंग और गहरा हो गया. समिति के सचिव प्रेम कुमार उर्फ मुन्ना भगत ने बताया कि समाज के कुलदेवता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए विशेष बलभद्र भोज का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों ने एक साथ बैठकर महाप्रसाद ग्रहण किया. इसके साथ ही रात्रि में भव्य भक्ति जागरण कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें नामचीन कलाकारों के भजनों पर श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे. व्याहुत समाज के लोगों की बढ़-चढ़कर की गई भागीदारी ने इस आयोजन को ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बना दिया.

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