मुरलीगंज में बलभद्र पूजनोत्सव पर भजन संध्या, आंचल प्रिया के भजनों पर देर रात तक झूमते रहे श्रद्धालु

Author Sanjay kumar|Edited by Amit Kr Sinha
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भक्ति जागरण प्रस्तुत करते कलाकार. | Prabhat Khabar Network

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मुरलीगंज में बलभद्र पूजनोत्सव पर भक्ति गीतों की स्वर लहरियों से माहौल भक्तिमय हो गया. भजन गायिका आंचल प्रिया की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को देर रात तक बांधे रखा.

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मुरलीगंज. रोशनी से जगमग आयोजन स्थल पर भक्ति गीतों की स्वर लहरियां गूंजीं तो पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा. बलभद्र पूजनोत्सव के तहत व्याहुत पंचायत समिति की ओर से आयोजित भजन संध्या में रविवार की रात श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. देर रात तक चले कार्यक्रम में भजन गायिका आंचल प्रिया की प्रस्तुति विशेष आकर्षण रही. उनके भजनों पर श्रद्धालु तालियों के साथ झूमते नजर आये.

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राधा-राधा नाम से शुरू हुई भजन संध्या

आंचल प्रिया ने भजन संध्या की शुरुआत ‘किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए, जुबां पे राधा-राधा नाम हो जाए’ से की. इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई भक्ति गीत प्रस्तुत किये. ‘ओ राधा तेरे बिना ये श्याम है आधा’ और ‘बम-बम बोल रहा है काशी’ जैसे भजनों पर श्रद्धालुओं ने जमकर तालियां बजायीं. धार्मिक जयकारों से पूरा परिसर देर रात तक गूंजता रहा.

विष्णु और मिलन ने भी बांधा समां

कार्यक्रम में गायक विष्णु और मिलन ने भी अपनी प्रस्तुति दी. दोनों कलाकारों ने अलग-अलग भक्ति गीतों के माध्यम से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा. भजन संध्या में मुरलीगंज के आसपास के इलाकों के अलावा दूसरे स्थानों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे.

मुरलीगंज के लोगों के स्नेह को बताया खास

प्रस्तुति के दौरान गायिका आंचल प्रिया ने मुरलीगंज के लोगों के स्नेह की सराहना की. उन्होंने कहा कि यहां के लोगों से उन्हें लगातार प्यार मिलता रहा है. ऐसे धार्मिक आयोजन में प्रस्तुति देना उनके लिए सुखद अनुभव है. उन्होंने आयोजन समिति के प्रति आभार जताया.

जयकारों के बीच निकली भगवान बलभद्र की विदाई यात्रा

पूजनोत्सव के अगले दिन सोमवार को भगवान बलभद्र की प्रतिमा की विदाई यात्रा निकाली गयी. व्याहुत पंचायत समिति परिसर में पूजा-अर्चना के बाद प्रतिमा को शोभायात्रा के रूप में काशीपुर स्थित बैंगा नदी तट ले जाया गया. गाजे-बाजे के साथ निकली यात्रा में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और युवा शामिल हुए.

पूरे रास्ते श्रद्धालु भगवान बलभद्र के जयकारे लगाते रहे. नदी तट पहुंचने के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गयी. इसके बाद परंपरागत तरीके से प्रतिमा का विसर्जन किया गया. प्रतिमा विसर्जन के साथ ही बलभद्र पूजनोत्सव का समापन हो गया. आयोजन को सफल बनाने में व्याहुत पंचायत समिति के पदाधिकारियों, सदस्यों और समाज के लोगों की सक्रिय भागीदारी रही.

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