दुर्दशा करनेवालों को लालू ने बनाया साथी : पप्पू यादव
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :12 May 2015 6:36 AM (IST)
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मधेपुरा : गलती की है लालू प्रसाद ने और जंगलराज का लेबल यादवों पर लग गया. पप्पू यादव ने एक साल से बिहार की सभी जातियों को यादवों से जोड़ने की कोशिश की. बिहार के नौजवानों को अपना लहू बनाया. बुजुर्गो के दिल में जगह खोजने की कोशिश की. यह लालू को बरदाश्त नहीं था. […]
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मधेपुरा : गलती की है लालू प्रसाद ने और जंगलराज का लेबल यादवों पर लग गया. पप्पू यादव ने एक साल से बिहार की सभी जातियों को यादवों से जोड़ने की कोशिश की. बिहार के नौजवानों को अपना लहू बनाया.
बुजुर्गो के दिल में जगह खोजने की कोशिश की. यह लालू को बरदाश्त नहीं था. इसी की सजा पप्पू यादव को मिली. उन्हें निलंबित कर दिया गया. सोमवार को बीएन मंडल स्टेडियम में आयोजित किसान हल-कुदाल महारैली में उक्त बातें सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कहीं. किसान महा पंचायत व युवा शक्ति की ओर से आयोजित महारैली में सांसद ने कहा कि मान सम्मान की खातिर पप्पू यादव गला कटवा लेगा, लेकिन सिर झुकने नहीं देगा.
उन्होंने कहा कि जब मुलायम देश के प्रधानमंत्री बनने वाले थे, तो लालू ने इसमें अड़ंगा डाला था. अब मुलायम रिश्तेदार हो गये हैं, तो लालू ने उन्हें नेता मान लिया है. बिहार में गत 10 साल में यादवों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है. दुर्दशा करने वाले और यादवों पर जंगलराज का ठीकरा फोड़ने वाले आज लालू जी के साथी हैं.
किसानों की व्यथा कथा के बारे में सांसद ने कहा कि चाय बनानेवाला दुकानदार भी अपनी चाय की कीमत तय करने का अधिकार रखता है, लेकिन किसान की फसल की कीमत कोई और तय करता है. जब तक किसानों केहित में 60 फीसदी फसल बीमा व कृषि को उद्योग का दर्जा नहीं मिल जाता तब तक किसानों का भला नहीं हो सकता है.
अंगरेजों ने मालगुजारी ठोक कर किसानों को बरबाद किया था. किसानों को अधिकार चाहिए. महीनों बाद मिलने वाला मुआवजा नहीं. जमीन के बदले रोजगार चाहिए. पांच हजार के लिए जब कोई किसान आत्महत्या कर लेता है तो पंचायत के मुखिया भी आंसू पोछने नहीं पहुंचते हैं.
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