यात्रियों की छूट जाती है ट्रेन
Updated at : 21 Nov 2019 7:33 AM (IST)
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मधेपुरा : असुविधाओं के जंजाल में फंसा दौराम मधेपुरा रेलवे स्टेशन की बेहाली का स्थिति जस की तस है. फिलहाल इसके सुधार को लेकर रेलवे का कोई साफ रुख नजर नहीं आ रहा है. हर रोज एक नई समस्या उभर कर सामने आती है. जिनका न तो निदान निकलता है न ही कोई कार्रवाई की […]
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मधेपुरा : असुविधाओं के जंजाल में फंसा दौराम मधेपुरा रेलवे स्टेशन की बेहाली का स्थिति जस की तस है. फिलहाल इसके सुधार को लेकर रेलवे का कोई साफ रुख नजर नहीं आ रहा है. हर रोज एक नई समस्या उभर कर सामने आती है. जिनका न तो निदान निकलता है न ही कोई कार्रवाई की जाती है.
कर्मचारियों की अनियमितता, पीने के लिए स्वच्छ पानी का अभाव से लेकर स्टेशन परिसर के अंदर कुड़ों का लगा ढेर इसका उदाहरण है. इसके अलावा एक और बड़ी समस्या है. जिसको लेकर रेलवे प्रशासन मौन है.इ ससे हर रोज मधेपुरा दौराम के हजारों यात्री एवं कर्मचारी जूझते हैं.
मधेपुरा दौरम में कहने को तो जनरेटर की व्यवस्था है, लेकिन उसे सिर्फ रात के समय में चालू किया जाता है. दिन में चालू करने की अनुमति स्टेशन प्रबंधक को नहीं है. इस बाबत वहां के कर्मचारियों ने बताया कि समस्तीपुर से कई बार हमने इसकी शिकायत की एवं नोटिस भी भेजा है, लेकिन इसको लेकर कोई जवाब नहीं आया है.
गाड़ी आने पर मच जाती है भगदड़: बिजली नहीं रहने के कारण दिन में गाड़ियों के उद्घोषणा नहीं होती है. इसके कारण गाड़ियों के आने के बाद पूछताछ काउंटर पर लोगों का जमावड़ा लग जाता है.
खासकर जब एक साथ दो गाड़ियां स्टेशन पर आकर रूकती तब यात्रियों के बीच भगदड़ मच जाती है और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है.
स्टेशन के कर्मचारी भी इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि सूचना किस तरह यात्रियों तक पहुंचाया जाय. बताते चले मुख्यालय स्थित दौराम मधेपुरा स्टेशन प्रतिदिन लगभग लाख से डेढ़ लाख के बीच की आमदनी रेलवे को देती है. इसके बावजूद दौराम मधेपुरा की प्रति रेलवे की यह रवैया चिंताजनक है.
यात्रा कर रही महिला यात्री रेखा देवी ने बताया कि हम लोग पढ़े लिखे नहीं हैं. कौन सी गाड़ी कहां जाएगी इसका पता हम हैं घोषणा से ही चलता है, लेकिन जब इस बात की घोषणा नहीं होती है तो बहुत असमंजस वाली स्थिति हमारे सामने उत्पन्न हो जाती है.
हमें पता ही नहीं चल पाता कि कौन सी गाड़ी पर हमें चढ़ना है. कई बार तो इस चक्कर में गाड़ी छूट भी जाती है. कई बार हम इधर पूछताछ काउंटर पर कतार में लगकर गाड़ी के बारे में पता कर रहे होते हैं और उधर गाड़ी खुल जाती है.
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