NEET-UG फर्जीवाड़ा मामले में मास्टरमाइंड से खुल सकते हैं कई राज, जांच के दायरे में और लोग

Author Pintu Pranav|Edited by System
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गिरफ्तार अभियुक्त को जांच के लिए अस्पताल ले जाते

NEET-UG: बीते 21 जून को लखीसराय के कई परीक्षा केंद्रों पर आयोजित NEET-UG परीक्षा के दौरान सामने आए फर्जीवाड़ा मामले में गिरफ्तार 30 आरोपियों में से दो को जांच एजेंसियां मुख्य सरगना मान रही हैं. पुलिस अर्पित सिंह और अश्विनी कुमार उर्फ मयंक कश्यप से लगातार पूछताछ कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि इन दोनों से मिली जानकारी के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सकता है. मामले की गंभीरता को देखते हुए लगातार छापेमारी और जांच अभियान जारी है.

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लखीसराय से राजीव मुरारी सिन्हा व राजेश कुमार की रिपोर्ट

NEET-UG: लखीसराय में NEET-UG परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं. पुलिस की नजर अब दो कथित मास्टरमाइंड पर टिकी है, जिनसे पूछताछ के आधार पर पूरे सॉल्वर गिरोह और नेटवर्क का पर्दाफाश होने की उम्मीद जताई जा रही है.

दो मास्टरमाइंड पर टिकी पुलिस की नजर

पुलिस सूत्रों के अनुसार गिरफ्तार अर्पित सिंह और अश्विनी कुमार उर्फ मयंक कश्यप पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी माने जा रहे हैं. दोनों से लगातार पूछताछ की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि अब तक की जांच में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं और गिरफ्तार आरोपियों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है.

पहले भी जांच एजेंसियों के रडार पर रहा अर्पित

जानकारी के अनुसार अर्पित सिंह मूल रूप से मुजफ्फरपुर जिले का निवासी है और गया स्थित एएनएमसीएच में एमबीबीएस चौथे वर्ष का छात्र बताया गया है. पुलिस के मुताबिक वर्ष 2024 में भी वह जांच एजेंसियों के रडार पर आ चुका था. उस समय उससे पूछताछ की गई थी, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उसे छोड़ दिया गया था.

मयंक कश्यप की पहचान को लेकर बड़ा खुलासा

जांच के दौरान दूसरा कथित मास्टरमाइंड मयंक कश्यप सबसे बड़ा खुलासा बनकर सामने आया है. प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तारी के बाद उसने खुद को मयंक कश्यप बताते हुए विभिन्न पहचान पत्र भी दिखाए. हालांकि बाद में पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) से मिली जानकारी में पता चला कि वह वहां अश्विनी कुमार के नाम से पंजीकृत छात्र है.अधिकारियों का कहना है कि उसकी वास्तविक पहचान और पूर्व गतिविधियों की गहन जांच की जा रही है. यह भी पता लगाया जा रहा है कि उसने पहले किसी अन्य परीक्षा में इसी तरह की भूमिका निभाई थी या नहीं.

अर्पित के टैब से मिल सकते हैं कई सुराग

जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि अर्पित सिंह के कब्जे से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरे नेटवर्क का राज खोल सकते हैं. उसकी गिरफ्तारी के बाद गया स्थित हॉस्टल के कमरे की तलाशी में एक टैब बरामद किया गया है. पुलिस का मानना है कि इसमें सॉल्वर गैंग, संपर्क सूत्रों और अन्य गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिल सकते हैं.

लगातार जारी है छापेमारी

मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद ही पूरे गिरोह की संरचना और उसकी कार्यप्रणाली स्पष्ट हो सकेगी.

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पिंटू प्रणव

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By पिंटू प्रणव

प्रभात खबर में कंटेंट राइटर, जिन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 5 साल से ज़्यादा का अनुभव है. न्यूज़ राइटिंग, कंटेंट क्रिएशन, कॉपी एडिटिंग, हेडलाइन राइटिंग और फ़ैक्ट-चेकिंग में अनुभवी. कृषि, वन और पर्यावरण, शिक्षा, राजनीति, टेलीकम्युनिकेशन, धर्म और आध्यात्मिक मामले, सामाजिक मुद्दे, NGO और संस्थान, सरकारी कामकाज और समसामयिक मामलों जैसे कई विषयों पर काम किया है. संपादकीय मानकों और न्यूज़रूम की कार्यक्षमता को बनाए रखते हुए सटीक, प्रभावशाली और पाठकों पर केंद्रित पत्रकारिता करने के लिए प्रतिबद्ध है.

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