लखीसराय में अनोखी पहल, भाभी की याद में बनेगा पुस्तकालय, गांव के बच्चों को मिलेगा पढ़ाई का ठिकाना

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पुस्तकालय की नींव रखते शिक्षक संतोष कुमार | Prabhat Khabar Network

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लखीसराय में एक दुखद घटना ने एक प्रेरणादायक पहल को जन्म दिया है. मुखिया अभिषेक राज ने अपनी दिवंगत भाभी रेखा कुमारी की याद में 'परिचारिका रेखा ज्ञान केंद्र' नामक पुस्तकालय की शुरुआत की है. यह पहल ग्रामीण छात्रों को बेहतर शिक्षा संसाधन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखती है.

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Lakhisarai Library Initiative: लखीसराय. किसी अपने को खोने का दुख लंबे समय तक परिवार के साथ रहता है, लेकिन कई बार यही दुख समाज के लिए किसी ऐसी पहल की वजह बन जाता है, जिसका लाभ वर्षों तक लोगों को मिलता रहता है. लखीसराय के पीरी बाजार प्रखंड अंतर्गत बरियारपुर पंचायत में ऐसी ही एक पहल सामने आयी है. पंचायत के मुखिया अभिषेक राज उर्फ चुन्नू ने अपनी दिवंगत भाभी स्व. रेखा कुमारी की स्मृति को स्थायी रूप देने के लिए पुस्तकालय की नींव रखी है.

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इस पुस्तकालय का नाम ‘परिचारिका रेखा ज्ञान केंद्र’ रखा गया है. इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए बेहतर और शांतिपूर्ण माहौल उपलब्ध कराना है. साथ ही विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की योजना है.

स्मृति को ज्ञान के केंद्र में बदलने की कोशिश

पुस्तकालय की नींव रखने के दौरान मुखिया अभिषेक राज ने कहा कि स्व. रेखा कुमारी की स्मृति को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए इस ज्ञान केंद्र की स्थापना की जा रही है. ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले विद्यार्थियों को अक्सर पढ़ाई के लिए अतिरिक्त संसाधनों और शांत वातावरण की जरूरत होती है. पुस्तकालय बनने के बाद ऐसे विद्यार्थियों को अपने ही पंचायत क्षेत्र में अध्ययन की सुविधा मिल सकेगी.

उन्होंने बताया कि ज्ञान केंद्र में विद्यार्थियों की जरूरत के अनुसार जरूरी किताबें उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जायेगी. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को भी इसका लाभ मिल सकेगा. खासकर ऐसे छात्र-छात्राओं के लिए यह पहल महत्वपूर्ण होगी, जिनके परिवार आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं हैं कि वे महंगे अध्ययन संसाधन या अलग से पढ़ाई की सुविधा जुटा सकें.

मृत्युभोज की परंपरा पर भी उठाया सवाल

पुस्तकालय की इस पहल के साथ मुखिया अभिषेक राज ने समाज में प्रचलित मृत्युभोज की परंपरा को लेकर भी लोगों से सोच बदलने की अपील की. उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की असामयिक या दुर्घटना में मृत्यु के बाद परिवार की ओर से मृत्युभोज पर बड़ी राशि खर्च करने के बजाय उस राशि का इस्तेमाल समाजहित के स्थायी कार्यों में किया जा सकता है.

उनका कहना है कि दिवंगत व्यक्ति की स्मृति में जरूरतमंद कन्या के विवाह में सहयोग, पुस्तकालय निर्माण, गरीब बच्चों की शिक्षा में मदद या पौधारोपण जैसे कार्य किये जा सकते हैं. ऐसी पहल से दिवंगत की स्मृति भी बनी रहती है और समाज को लंबे समय तक उसका लाभ मिलता है.

इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी दिवंगत भाभी की स्मृति में पुस्तकालय की नींव रखने का फैसला किया. उनके अनुसार, मृत्युभोज में खर्च होने वाली राशि यदि किसी बच्चे की पढ़ाई या पुस्तकालय जैसी स्थायी व्यवस्था में लगायी जाये, तो उसका लाभ केवल एक दिन नहीं बल्कि वर्षों तक समाज के लोगों को मिल सकता है.

ग्रामीण बच्चों के लिए गांव में ही बनेगा पढ़ाई का ठिकाना

बरियारपुर पंचायत में पुस्तकालय शुरू होने से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए दूर जाने की जरूरत कम हो सकती है. ग्रामीण इलाकों में शांत अध्ययन स्थल और किताबों की उपलब्धता कई विद्यार्थियों के लिए बड़ी जरूरत होती है. ऐसे में पंचायत स्तर पर ज्ञान केंद्र की स्थापना बच्चों और युवाओं के लिए पढ़ाई का नया विकल्प तैयार कर सकती है.

स्थानीय ग्रामीणों में भी इस पहल को लेकर उत्साह देखा गया. ग्रामीणों ने मुखिया के कदम की सराहना करते हुए कहा कि पंचायत में पुस्तकालय खुलने से विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को फायदा होगा. उन्हें स्थानीय स्तर पर पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण मिल सकेगा.

Lakhisarai Library Initiative: आगे पुस्तकालय की सुविधाओं से तय होगा असर

पुस्तकालय की नींव रखे जाने के बाद अब इसकी सुविधाओं और नियमित संचालन पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा. पर्याप्त किताबें, प्रतियोगी परीक्षाओं की अध्ययन सामग्री और शांतिपूर्ण अध्ययन व्यवस्था उपलब्ध होने पर यह ज्ञान केंद्र ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है.

बरियारपुर की यह पहल एक परिवार की निजी स्मृति से शुरू होकर सामुदायिक शिक्षा के संसाधन में बदलने की कोशिश है. यदि पुस्तकालय नियमित रूप से संचालित होता है और विद्यार्थियों की जरूरत के मुताबिक अध्ययन सामग्री बढ़ायी जाती है, तो आने वाले समय में यह पंचायत के बच्चों और युवाओं के लिए एक स्थायी शैक्षणिक केंद्र बन सकता है.

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