नीट यूजी फर्जीवाड़ा : पैसे के लेन-देन में बड़े सफेदपोश व कोचिंग माफिया की भूमिका की जांच शुरू

Edited by AJEET KUMAR
Updated:
विज्ञापन

नीट यूजी फर्जीवाड़ा में गिरफ्तार फर्जी परीक्षार्थी (फाइल फोटो)

नीट यूजी-2025 में जिले के तीन परीक्षा केंद्रों से फर्जी परीक्षार्थियों के पकड़े जाने के बाद रोज नये खुलासे हो रहे हैं. पुलिस ने अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि किंगपिन रविशंकर उर्फ सम्राट समेत कई फरार हैं.

विज्ञापन
लखीसराय से राजीव मुरारी सिन्हा की रिपोर्ट

Lakhisaray News : नीट यूजी-2025 में जिले के तीन परीक्षा केंद्रों से फर्जी परीक्षार्थियों के पकड़े जाने के बाद रोज नये खुलासे हो रहे हैं. जांच में सामने आया कि यह महज स्थानीय गैंग नहीं, बल्कि झारखंड, ओडिशा, नालंदा, गया, पटना तक फैला अंतरराज्यीय सिंडिकेट है. प्रति छात्र 30 से 40 लाख रुपये में मेडिकल सीट दिलाने की डील होती थी. पुलिस ने अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि किंगपिन रविशंकर उर्फ सम्राट समेत कई फरार हैं.

ऐसे खुली पोल: एक लड़की की घबराहट से टूटा पूरा नेटवर्क

21 जून को परीक्षा के दौरान दोपहर दो बजे केंद्रीय विद्यालय किऊल के केंद्राधीक्षक अमित कुमार को कमरा नंबर-11 में गड़बड़ी की भनक लगी. मजिस्ट्रेट महेश कुमार वर्णवाल और एसआई रजनी कुमारी के साथ संदिग्ध छात्रा पूनम कुमारी के एडमिट कार्ड-आधार कार्ड का मिलान किया गया. घबरायी पूनम ने पूरा राज उगल दिया. इसके बाद छह अन्य कमरों से एक-एक कर फर्जी परीक्षार्थी दबोच लिये गये. केआरके और हसनपुर हाईस्कूल से भी एक-एक फर्जी परीक्षार्थी पकड़ा गया. एफएसएल टीम ने मौके से 7 एडिटेड आधार कार्ड, 7 एडमिट कार्ड, बायोमेट्रिक टीम के 4 टैबलेट, 2 होलोग्राम स्टीकर और 7 मोबाइल जब्त किये. लोक परीक्षा अधिनियम-2024 और बीएनएस के तहत केस दर्ज हुआ है.

30-40 लाख की डील: ओडिशा की बीएएमएस, बीएचयू की नर्सिंग छात्रा भी शामिल

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मुख्य सरगना अर्पित सिंह और पीएमसीएच के छात्र अश्विनी कुमार उर्फ मयंक कश्यप के मोबाइल से चौंकाने वाले इनपुट मिले हैं. सिंडिकेट में ओडिशा की बीएएमएस छात्रा और बीएचयू बनारस की नर्सिंग छात्रा को भी सॉल्वर बनाकर उतारा गया था. पैसे के लेन-देन में बड़े सफेदपोश और कोचिंग माफिया की भूमिका की जांच हो रही है. पावापुरी मेडिकल कॉलेज का छात्र रवि उर्फ रविशंकर उर्फ सम्राट सिंह, पीएमसीएच के सौरभ कुमार, अश्विनी कुमार और राजन कुमार की गिरफ्तारी के लिए ताबड़तोड़ छापेमारी चल रही है.

ऐसे होता है ‘सॉल्वर गैंग’ का खेल

  1. असली उम्मीदवार की तलाश: कमजोर या अमीर बैकग्राउंड वाले छात्रों से लाखों में डील. टोकन मनी मिलते ही काम शुरू.
  2. ‘स्कॉलर’ का चयन: प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज/कोचिंग के मेधावी छात्रों को 2-5 लाख का लालच. ये पहले ही नीट क्रैक कर चुके होते हैं.
  3. ‘मर्फिंग’ से पहचान बदलना: असली छात्र और सॉल्वर के चेहरे को सॉफ्टवेयर से मिलाकर एडमिट कार्ड-फर्जी आधार बनाया जाता है. वीक्षक धोखा खा जाते हैं.
  4. बायोमेट्रिक बाईपास: असली छात्र के अंगूठे का सिलिकॉन थिन फिल्म बनाकर सॉल्वर अपने अंगूठे पर चिपका लेता है. मशीन को चकमा दे देता है.
  5. केंद्र पर ‘सेटिंग’: कुछ कर्मचारियों-सुरक्षाकर्मियों को मोटी रकम देकर एंट्री के वक्त जांच ढीली करायी जाती है.

एनटीए का दावा: एआई फेस रिकग्निशन, डिजिटल वेरिफिकेशन से हर साल सॉल्वर पकड़े जा रहे हैं, लेकिन तकनीक अपग्रेड होते ही जालसाज भी नये तरीके अपना रहे हैं. आगे से और कड़ी व्यवस्था होगी.

ALSO RESD : बिहार में 1 रुपये क्यों दी गई 15 एकड़ जमीन, सरकार का मेगा प्लान जानिए

विज्ञापन
AJEET KUMAR

लेखक के बारे में

By AJEET KUMAR

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन