लखीसराय POCSO कोर्ट का बड़ा फैसला: नाबालिग भांजी से हैवानियत करने वाले कलयुगी मामा को 20 साल की कठोर जेल, 1.05 लाख जुर्माना
फोटो- व्यवहार न्यायालय लखीसराय
लखीसराय की पॉक्सो अदालत ने एक नाबालिग भांजी के यौन उत्पीड़न और धमकी देने के मामले में आरोपी मामा को 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने दोषी पर 1.05 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
लखीसराय. नाबालिग भांजी के यौन उत्पीड़न और धमकी देने के मामले में लखीसराय की विशेष पॉक्सो अदालत ने गुरुवार को आरोपी मामा को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनायी. अदालत ने दोषी पर कुल 1,05,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया. मामले की सुनवाई जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम सह विशेष पॉक्सो न्यायाधीश श्वेता वर्मा की अदालत में हुई.
पॉक्सो एक्ट की धारा 6 में 20 साल का कठोर कारावास
मामला पॉक्सो केस संख्या 37/2023 और लखीसराय महिला थाना केस संख्या 35/2023 से संबंधित है. अदालत ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी पाते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी. अर्थदंड नहीं देने पर तीन महीने की अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी.
धमकी देने के मामले में भी दो साल की सजा
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के तहत भी दोषी को दो वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनायी. अर्थदंड नहीं देने पर तीन महीने की अतिरिक्त साधारण कारावास का प्रावधान किया गया है. न्यायालय के आदेश के अनुसार दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी.
सजा वारंट जारी कर मंडल कारागार भेजने का निर्देश
अदालत ने सजा वारंट जारी करते हुए दोषी को तत्काल लखीसराय मंडल कारागार भेजने का निर्देश दिया. पीड़िता पक्ष की ओर से लोक अभियोजक गुप्तेश्वर सिंह ने पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष की ओर से डालसा के प्रजापति झा उपस्थित रहे.
दोषी करार होने के बाद कोर्ट परिसर में हुआ था हंगामा
मामले में गत 31 अगस्त को अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया था. दोषी करार दिये जाने के बाद कटघरे में मौजूद आरोपी और वहां पहुंचे उसके परिजनों ने हंगामा किया था. इस दौरान आरोपी की पत्नी ने अपने हाथों की चूड़ियां तोड़ दी थीं.बताया गया कि हंगामे के बीच दोषी ने पत्नी की टूटी चूड़ी का कांच उठाकर अपने हाथ की नस काटने का प्रयास किया था. इससे उसके हाथ में कई जगह चोट ल गी और वह खून से लथपथ होकर गिर पड़ा था. घटना के बाद अदालत परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बन गयी थी.
अदालत के फैसले से बच्चों की सुरक्षा को लेकर कड़ा संदेश
अदालत का फैसला बच्चों के खिलाफ यौन अपराध के मामलों में कानून की सख्ती को रेखांकित करता है. मामले में दोषसिद्धि और सजा के बाद यह संदेश गया है कि रिश्तों और विश्वास की आड़ में नाबालिगों के साथ अपराध करने वालों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है.
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