विकास मंजूर है, पर हमारा रास्ता क्यों छीना?'; लखीसराय में 1500 करोड़ के सोलर प्लांट की दीवार से दर्जनों गांवों का मार्ग बंद, भारी आक्रोश

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फोटो- ग्रामीणों को समझाते मुखिया अभिषेक राज | Prabhat Khabar Network

कजरा सोलर पावर प्लांट के निर्माण ने दर्जनों गांवों का मुख्य संपर्क मार्ग बंद कर दिया है. ग्रामीण विकास परियोजनाओं के समर्थक हैं, लेकिन वर्षों से चले आ रहे उनके रास्ते को बाधित करने से उनमें भारी आक्रोश है. वैकल्पिक मार्ग की मांग को लेकर उन्होंने उच्च अधिकारियों को आवेदन भेजा है.

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पीरी बाजार (लखीसराय). थाना क्षेत्र के बरियारपुर से घोंघी-कोड़ासी जाने वाला मुख्य संपर्क मार्ग कजरा सोलर पावर प्लांट की चारदीवारी निर्माण के कारण बंद हो गया है. वर्षों से इस रास्ते का उपयोग करने वाले ग्रामीणों का कहना है कि मार्ग बंद होने से रोजमर्रा के आवागमन के साथ कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है.

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1231 एकड़ में तैयार हो रहा सोलर पावर प्लांट

ग्रामीणों के अनुसार लखीसराय से करीब 25 किलोमीटर दूर कजरा के टाली कोड़ासी गांव के समीप 1231 एकड़ भूमि पर सोलर पावर प्लांट तैयार किया गया है. करीब 1500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना से 301 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य बताया गया है. इसी परियोजना की चारदीवारी निर्माण के बाद संपर्क मार्ग बंद होने को लेकर विवाद सामने आया है.

दर्जनों गांवों के आवागमन का था मुख्य रास्ता

ग्रामीणों के अनुसार बरियारपुर, घोंघी, घोड़ा-कोड़ासी, गंगटिहया मुसहरी, तेतरिया कोड़ासी, घोड़ा सोनातरा, भाटी, कौल महरथपुर मुसहरी सहित आसपास के कई गांवों के लोग इसी रास्ते से आवागमन करते थे. चारदीवारी बनने के बाद रास्ता पूरी तरह बाधित हो गया है.

किसानों और स्कूली बच्चों पर सीधा असर

मार्ग बंद होने से किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है. ग्रामीणों का कहना है कि इससे कृषि कार्य प्रभावित हो रहा है. वहीं स्कूली बच्चों को विद्यालय जाने के लिए करीब दो से तीन किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है. आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी चुनौती बन गया है.

विकास परियोजना के विरोध में नहीं हैं ग्रामीण

बरियारपुर पंचायत के मुखिया अभिषेक राज उर्फ चुन्नू ने कहा कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान और अनुसूचित जनजाति परिवार रहते हैं. उन्होंने कहा कि ग्रामीण सोलर पावर प्लांट जैसी विकास परियोजना के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर आम लोगों का वर्षों पुराना आवागमन बाधित नहीं होना चाहिए. उनके अनुसार चारदीवारी निर्माण से पहले वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की जानी चाहिए थी.

मुख्यमंत्री से डीएम तक भेजा सामूहिक आवेदन

मामले को लेकर ग्रामीणों की ओर से मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, केंद्रीय मंत्री सह क्षेत्रीय सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, मुंगेर आयुक्त प्रेम कुमार मीणा, जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार और क्षेत्रीय विधायक रामानंद मंडल को सामूहिक आवेदन भेजा गया है.

स्थायी वैकल्पिक सड़क की मांग

ग्रामीणों ने आवेदन के माध्यम से संपर्क मार्ग बंद होने की जांच कराने और उसके स्थान पर स्थायी वैकल्पिक सड़क उपलब्ध कराने की मांग की है. ग्रामीणों ने कहा कि वे जल्द ही संबंधित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से मुलाकात कर समस्या से अवगत कराएंगे. उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन मामले की गंभीरता को देखते हुए शीघ्र पहल करेगा और आवागमन की समस्या का स्थायी समाधान निकालेगा.


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