आठ दशक से पुल का इंतजार, किशनगंज में गोरियाधार की नदी में उतरकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन
नदी में उतर विरोध जताते ग्रामीण | Prabhat Khabar Network
किशनगंज में ग्रामीण 8 दशक से गोरियाधार में पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं. आजादी के बाद से चली आ रही इस समस्या को लेकर आज महिलाएं और बच्चे नदी में उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं. पुल की कमी से लोगों के दैनिक जीवन, बच्चों की पढ़ाई और क्षेत्र का विकास प्रभावित हो रहा है.
Goriyadhar Bridge Demand Kishanganj: किशनगंज. नदी के बीच खड़े होकर महिलाएं, ग्रामीण और छोटे-छोटे बच्चे एक ही मांग उठा रहे थे - गोरियाधार में आरसीसी पुल चाहिए. टेढ़ागाछ प्रखंड की चिल्हनियां पंचायत के बात्तर टोला खर्रा गांव के समीप शनिवार को ग्रामीणों का आक्रोश उस समय सड़क पर नहीं, बल्कि नदी के अंदर दिखाई दिया. गोरियाधार में पुल निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण नदी में उतर गये और शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
ग्रामीणों का कहना है कि पुल की मांग कोई नई नहीं है. आजादी के बाद से ही गोरिया नदी पर आरसीसी पुल बनाने की मांग उठती रही है, लेकिन करीब आठ दशक गुजर जाने के बाद भी उन्हें स्थायी आवागमन की सुविधा नहीं मिल सकी है. बरसात आते ही नदी पार करना लोगों के लिए और मुश्किल हो जाता है.
नदी बढ़ती है तो बढ़ जाता है ग्रामीणों का संकट
चिल्हनियां पंचायत के वार्ड संख्या एक स्थित बात्तर टोला खर्रा गांव के समीप गोरियाधार क्षेत्र में पुल नहीं होने का असर आसपास के कई गांवों के लोगों पर पड़ रहा है. ग्रामीणों के अनुसार सामान्य दिनों में किसी तरह नदी पार कर लोग अपने जरूरी काम के लिए आते-जाते हैं, लेकिन बारिश के मौसम में जलस्तर बढ़ने के साथ परेशानी कई गुना बढ़ जाती है.
ऐसे समय में लोगों को नदी पार करने के लिए जोखिम उठाना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि रोजमर्रा के काम, बाजार, इलाज और सरकारी सेवाओं के लिए प्रखंड और जिला मुख्यालय तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है.
शनिवार को हुए प्रदर्शन में महिलाओं के साथ बच्चे भी नदी में उतरे. यह दृश्य ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही समस्या की गंभीरता को सामने लाता है.
सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को
पुल नहीं होने का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं है. ग्रामीणों के अनुसार इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है. नदी पार कर विद्यालय जाने वाले बच्चों को मौसम की स्थिति के अनुसार रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है.
बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने पर बच्चों और उनके अभिभावकों की चिंता और बढ़ जाती है. ग्रामीणों का कहना है कि पुल बन जाने से बच्चों के लिए विद्यालय तक पहुंचना आसान होगा और मौसम की वजह से पढ़ाई प्रभावित होने की समस्या भी कम होगी.
यही वजह है कि ग्रामीण अब पुल निर्माण को केवल सड़क और आवागमन की सुविधा नहीं, बल्कि बच्चों की शिक्षा और क्षेत्र के विकास से जोड़कर देख रहे हैं.
सांसद से लेकर अधिकारियों तक दे चुके हैं आवेदन
चिल्हनियां पंचायत के सरपंच कैलाश बोसाक ने कहा कि गोरियाधार में पुल निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीण सांसद, एमएलसी, विधायक, जिला पदाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों को कई बार लिखित आवेदन दे चुके हैं.
ग्रामीणों के अनुसार लगातार मांग और आवेदन के बावजूद अब तक पुल निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है. इसी वजह से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि यहां आरसीसी पुल का निर्माण हो जाता है, तो आसपास के गांवों के लोगों को प्रखंड और जिला मुख्यालय तक आने-जाने में काफी सुविधा मिलेगी. बरसात के दौरान नदी पार करने का जोखिम भी कम होगा.
Goriyadhar Bridge Demand Kishanganj: आठ दशक पुरानी मांग का अब क्या होगा समाधान
गोरियाधार में शनिवार का प्रदर्शन केवल एक दिन की नाराजगी नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही मांग का परिणाम बताया जा रहा है. ग्रामीणों ने प्रशासन से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने और आरसीसी पुल निर्माण की दिशा में शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की है.
फिलहाल ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग स्थल का निरीक्षण करे, पुल निर्माण की जरूरत और व्यवहार्यता का आकलन करे और आगे की प्रक्रिया स्पष्ट करे. इससे वर्षों से चली आ रही समस्या के समाधान की दिशा में ठोस कदम बढ़ सकेगा.
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुल नहीं बनता, तब तक नदी पार करने की समस्या बनी रहेगी. ऐसे में गोरियाधार का पुल अब स्थानीय लोगों के लिए सुविधा से अधिक सुरक्षा, शिक्षा और रोजमर्रा के जीवन से जुड़ा सवाल बन गया है.
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