ठाकुरगंज में फिर एमएसडीपी घोटाले को ले बीडीओ के पत्र से बढ़ी हलचल

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 22 Oct 2024 8:19 PM

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प्रखंड विकास पदाधिकारी के पत्रांक 733 दिनांक 19 अक्तूबर को निर्गत पत्र ने वर्षो पूर्व हुए एम्एसडीपी घोटाले की याद ताजा कर दी है.

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ठाकुरगंज. क्या एम्एसडीपी घोटाले का जिन्न फिर से निकल चुका है. ठाकुरगंज प्रखंड विकास पदाधिकारी के एक पत्र से इस मामले को बल मिलने लगा है. प्रखंड विकास पदाधिकारी के पत्रांक 733 दिनांक 19 अक्तूबर को निर्गत पत्र ने वर्षो पूर्व हुए एम्एसडीपी घोटाले की याद ताजा कर दी है. प्रखंड विकास पदाधिकारी ने प्रखंड के उन 79 प्रधानाध्यापकों को पत्र लिख कर उनके स्कूल में बने एक कमरे के अतिरिक्त वर्ग कक्ष का निर्माण के लिए उपलब्ध कराई गई राशि के आलोक में निर्माण कार्य की भौतिक स्थिति उपलब्ध करवाने का निर्देश दिया है. इस पत्र के मिलने के बाद प्रखंड में हलचल तेज हो गई है. हालांकि बताते चले जिन स्कूलों को राशि आवंटित की गई थी वहां लगभग प्रत्येक जगह निर्माण कार्य अधूरा ही पड़ा है. न केवल एक कमरा का अतिरिक्त वर्ग कक्ष बल्कि उस दौरान इस योजना से बनने वाली आंगन बाड़ी भवनों के निर्माण में भी घोटाले की गूंज उठी थी और मामला पटना हाईकोर्ट तक पहुंच गया था. ऐसी आशंका प्रकट की गई थी की केवल ठाकुरगंज प्रखंड में करीब पांच करोड़ का एमएसडीपी घोटाला हुआ था. बताते चले जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी के पत्रांक 266 दिनांक 18.8.14 के अनुसार जिले में 469 प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में अतिरिक्त वर्ग कक्ष बनाने की योजना थी. अल्पसंख्यक कल्याण विभाग बिहार सरकार ने अपने ज्ञापांक 229 दिनांक 27.12.11 के तहत केन्द्रांश मद में 629.03 लाख रुपये व राज्यांश मद में 209.875 रुपए रुपये आवंटित किये थे. लेकिन इस योजना में ठाकुरगंज प्रखंड में शुरुआत से ही बड़े पैमाने पर फैले भ्रष्टाचार के बाद प्रभात खबर ने लगातार इस मामले को उठाया और मामला उजागर होने के बाद जब जिला पदाधिकारी के द्वारा जांच की गई तो कई रहस्यमय तथ्य उजागर हुए. जांच टीम की रिपोर्ट पर तत्कालीन डीएम पंकज दीक्षित ने विभाग को पत्र लिख वित्त विभाग से अंकेक्षण कराने की अनुशंसा की थी. इस घोटाले को लेकर ठाकुरगंज थाना में वर्ष 2013 में कांड संख्या 261/13 भी दर्ज हुआ था और मामले के मुख्य आरोपित तत्कालीन बीडीओ ठाकुरगंज पीटर ¨मिंज व नाजिर के साथ कई जन प्रतिनिधियों को आरोपित बनाया गया था. इस घोटाले को लेकर नाजिर की गिरफ्तारी भी हुई थी. जबकि पीटर मिंज के फरार हो जाने से उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी. हालांकि 19 दिसंबर वर्ष 2014 को तत्कालीन बीडीओ पीटर मिंज को उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई थी.

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