11 नन्हे सपनों पर लगा इंतजार का ताला, RTE नामांकन में देरी से मचा हड़कंप

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प्रखंड संसाधन केंद्र ठाकुरगंज

Thakurganj RTE Admission Delay: शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत किशनगंज जिले के विभिन्न प्रखंडों के 11 गरीब व वंचित वर्ग के बच्चों का निजी स्कूलों में चयन होने के बावजूद नामांकन अटक गया है. शैक्षणिक सत्र 2026-27 में चयनित बच्चों का दाखिला लटकाने वाले सात निजी विद्यालयों के खिलाफ शिक्षा विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए जवाब-तलब किया है.

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ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट

Thakurganj RTE Admission Delay: बिहार के सीमांचल प्रक्षेत्र अंतर्गत किशनगंज जिले में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून को कड़ाई से लागू करने की कड़ियों के बीच एक गंभीर विसंगति सामने आई है. आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित समाज के जिन 11 बच्चों का चयन ऑनलाइन लॉटरी के जरिए नामचीन निजी स्कूलों के लिए हुआ था, उन्हें स्कूल प्रशासन की सुस्ती के कारण अब तक दाखिला नहीं मिल सका है. नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की कक्षाएं नियमित रूप से शुरू हो चुकी हैं, लेकिन ये कनिष्ठ छात्र आज भी स्कूल की चौखट पर पहुंचने के इंतजार में हैं. इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा विभाग के वरिष्ठ कप्तानों ने जिले के सात चिन्हित निजी विद्यालयों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

आरटीई की धारा 12(1)(C) के तहत हुआ था चयन; पोर्टल अपडेट न होने पर नाराजगी

निजी स्कूलों की मनमानी और विभागीय दिशा-निर्देशों की मुख्य कड़ियां इस प्रकार हैं. आरटीई अधिनियम की धारा 12(1)(C) के तहत निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब परिवारों के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने का विधिक प्रावधान संधारित है.

ऑनलाइन पारदर्शिता के तहत लॉटरी के जरिए इन 11 बच्चों को सीटें आवंटित की गई थीं, जिससे पीड़ित कली-मजदूर अभिभावकों में नई उम्मीद जगी थी. हालांकि, चयन सूची जारी होने के हफ्तों बाद भी संबंधित स्कूलों ने न तो बच्चों का नामांकन पूरा किया और ना ही सरकारी आरटीई पोर्टल पर उनकी लाइव स्थिति को अद्यतन (अपडेट) किया, जिससे पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

Thakurganj RTE Admission Delay: कागजी खानापूर्ति नहीं, सीधे नियमानुसार विधिक कार्रवाई की चेतावनी

“विभागीय सूत्रों के अनुसार, शिक्षा कार्यालय ने इस विसंगति को केवल औपचारिक पत्राचार तक सीमित नहीं रखा है. सात निजी शिक्षण संस्थानों को कड़ा नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा गया है. पत्र में दो टूक कहा गया है कि यदि चयनित बच्चों का नामांकन 24 घंटे के भीतर सुनिश्चित कर पोर्टल पर लाइव डेटा सिंक नहीं किया गया, तो आरटीई के विधिक नियमों और कनिष्ठ सेवा शर्तों के उल्लंघन के आरोप में इन स्कूलों की मान्यता रद्द करने की विधिक कमान कसी जाएगी.”

सिर्फ आंकड़ा नहीं, बच्चों के भविष्य और आत्मविश्वास का है यक्ष प्रश्न

विशेषज्ञों और प्रबुद्ध नागरिकों का मानना है कि यह मामला केवल 11 बच्चों के दाखिले के आंकड़ों का नहीं है, बल्कि शिक्षा की मूल भावना से जुड़ा हुआ है. जहां एक ओर रसूखदार परिवारों के बच्चे महंगे अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में पढ़ाई शुरू कर चुके हैं, वहीं दूसरी ओर इन गरीब मेधावियों का दाखिला अटकने से उनके कोमल मन और आत्मविश्वास पर विपरीत असर पड़ रहा है.

अभिभावकों की आंखें अब विभाग की मुस्तैदी पर टिकी हैं. स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि ऐसे कनिष्ठ बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले निजी स्कूल प्रबंधकों की मनमानी का स्थाई समाधान निकाला जाए, ताकि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ धरातल पर कली-मजदूरों के बच्चों तक बिना किसी प्रशासनिक फजीहत के सुचारू रूप से संधारित हो सके.

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Divyanshu Prashant

लेखक के बारे में

By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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