ठाकुरगंज में 28 नवंबर को सजेगी देश के नामचीन शायरों की महफिल: कटहलडांगी कर्बला मैदान में ऑल इंडिया मुशायरा

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आयोजित बैठक | Prabhat Khabar Network

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सीमांचल में नशे के खिलाफ आवाज उठाने और शिक्षा की अलख जगाने के संकल्प के साथ 28 नवंबर 2026 को ठाकुरगंज में 'ऑल इंडिया महफ़िल-ए-मुशायरा' का आयोजन हो रहा है. मंजर भोपाली और सबा बलरामपुरी जैसे देश के दिग्गज शायर अपनी रचनाओं से समाज को प्रेरित करेंगे.

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सीमांचल क्षेत्र में नशामुक्त समाज के निर्माण और जन-जन तक शिक्षा की अलख जगाने के पावन संकल्प के साथ ठाकुरगंज प्रखंड की पटेसरी पंचायत अंतर्गत कटहलडांगी कर्बला मैदान में आगामी 28 नवंबर 2026, शनिवार को एक दिवसीय भव्य 'ऑल इंडिया महफ़िल-ए-मुशायरा' का आयोजन किया जाएगा.

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साहित्यिक समागम की तैयारियों, मंच व्यवस्था और विधि-व्यवस्था की रूपरेखा तय करने को लेकर आयोजन समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, जिसमें सीमांचल के कोने-कोने से आने वाले हजारों श्रोताओं के स्वागत और कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने पर विस्तार से विमर्श किया गया.

मंजर भोपाली और सबा बलरामपुरी समेत जुटेंगे देश के दिग्गज शायर

आयोजन समिति के अनुसार, इस राष्ट्रीय महफ़िल-ए-मुशायरा में उर्दू और हिंदी साहित्य के देशव्यापी ख्याति प्राप्त शायर और शायराएं अपनी पुरअसर रचनाओं से समां बांधेंगे.

मंच पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति के शायर मंजर भोपाली, नदीम फ़र्ख, प्रतिभा यादव, बेलाल सहारनपुरी, अज़म शिकरी, फ़ेमस खतौली, हिमांशु बाबरा, हाशिम फ़िरोज़ाआबादी, आदिल रशीद, प्रियांशु वात्सल्य और अपनी मखमली आवाज के लिए जानी जाने वाली शायरा सबा बलरामपुरी मुख्य आकर्षण होंगी. इन फनकारों की मौजूदगी से सीमांचल की सरजमीं पर अदब और तरन्नुम का अनूठा संगम देखने को मिलेगा.

शायरी के जरिए नशे पर वार, तालीम की अहमियत पर रहेगा जोर

बैठक में आयोजकों ने स्पष्ट किया कि इस बड़े आयोजन का मकसद महज शायरी का लुत्फ उठाना या मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए एक ठोस सामाजिक संदेश देना है.

देशभर से आ रहे शायर अपनी नज्मों, गजलों और कलामों के माध्यम से समाज में जहर की तरह फैल रहे नशे के दुष्प्रभावों से आगाह करेंगे और नौजवानों को इससे पूरी तरह दूर रहने का आह्वान करेंगे. इसके साथ ही पिछड़े और सीमावर्ती इलाके में आधुनिक व नैतिक शिक्षा के प्रसार तथा सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि भटकते युवाओं को रचनात्मक दिशा मिल सके.

अदब के जरिए नई पीढ़ी में सकारात्मक सोच जगाने का प्रयास

आयोजन समिति के वक्ताओं ने कहा कि अदब और साहित्य समाज का दर्पण होते हैं और यह समाज की सोच बदलने का सबसे प्रभावी माध्यम है. शायरी के मजबूत शब्दों के जरिए नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने, सकारात्मक सोच अपनाने और अपने बेहतर मुस्तकबिल के निर्माण की प्रेरणा दी जाएगी. आयोजकों को विश्वास है कि यह ऐतिहासिक शाम केवल मनोरंजन की नहीं, बल्कि सीमांचल में एक बड़े सामाजिक नवजागरण की शुरुआत बनेगी.

तैयारी बैठक में प्रबुद्धजनों ने लिया सफल आयोजन का संकल्प

कटहलडांगी में आयोजित इस महत्वपूर्ण तैयारी बैठक में विभिन्न समुदायों के गणमान्य नागरिकों, शिक्षाविदों और जनप्रतिनिधियों ने एकजुट होकर सहयोग का भरोसा दिया.

बैठक में प्रमुख रूप से मंसूर आलम, दिलशाद राही, कन्हैया लाल महतो, मोहम्मद इफ्तेखार, जफीर आलम, मौलाना तहसीन रजा, नजमुल हसनैन उर्फ जकी, मोहम्मद शादाब गयूर, मोहम्मद जकी, गुलाम जिलानी, कौशर आलम, मनोव्वर आलम और मोहम्मद मचान सहित दर्जनों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण व युवा उपस्थित रहे.

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