किशनगंज में SSB अधिकारी बन चूना लगा रहा फर्जी 'संजय सिंह': फर्जी SMS भेजकर दुकानदारों से ठगी; जानें साइबर फ्रॉड का नया तरीका
फोटो- ठगी करने वाले का फर्जी पहचान पत्र. | Prabhat Khabar Network
किशनगंज में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है. संजय सिंह नाम का एक जालसाज खुद को एसएसबी अधिकारी बताकर दुकानदारों और भट्ठा संचालकों को निशाना बना रहा है. फर्जी भुगतान संदेश भेजकर यह ठग बार-बार पैसे ऐंठ रहा है.
किशनगंज. सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले एक कथित ठग गिरोह का मामला सामने आया है. प्राप्त जानकारी और सामने आए ऑडियो क्लिप के अनुसार, संजय सिंह नाम से पहचान बताने वाला एक जालसाज स्थानीय व्यवसायियों, खासकर राशन दुकानदारों और ईंट-भट्ठा संचालकों को निशाना बना रहा है. आरोप है कि वह खुद को नजदीकी एसएसबी कैंप का अधिकारी या प्रतिनिधि बताकर सामान की आपूर्ति के नाम पर दुकानदारों से ठगी करता है.
एसएसबी अधिकारी बताकर पहले देता है सामान का बड़ा ऑर्डर
बताया जा रहा है कि ठगी के लिए जालसाज पहले राशन दुकानों या ईंट-भट्ठा संचालकों से संपर्क करता है. वह खुद को एसएसबी कैंप का प्रतिनिधि बताकर बड़ी मात्रा में सामान का ऑर्डर देता है. इसके बाद दुकानदार से सामान की पूरी लिस्ट और बिल की राशि तैयार करने को कहा जाता है. कथित जालसाज ऑनलाइन भुगतान करने के बहाने दुकानदार से बैंक खाते का विवरण भी मांगता है.
20 हजार के बिल पर भेजता है 50 हजार का फर्जी मैसेज
ठगी का कथित तरीका यहीं से शुरू होता है. उदाहरण के तौर पर यदि सामान का बिल 20 हजार रुपये का है तो जालसाज दुकानदार के मोबाइल पर 50 हजार रुपये ट्रांसफर होने का फर्जी एसएमएस या भुगतान का स्क्रीनशॉट भेज देता है.
इसके बाद वह दुकानदार से कहता है कि गलती से 30 हजार रुपये अतिरिक्त ट्रांसफर हो गये हैं. कथित ठग इस अतिरिक्त राशि को सरकारी पैसा बताकर तत्काल वापस भेजने का दबाव बनाता है.
पैसा लौटाने के बाद दोबारा करता है दबाव
आरोप है कि दुकानदार द्वारा अतिरिक्त राशि वापस भेजने के बाद जालसाज फिर दावा करता है कि उसके खाते में पैसा नहीं पहुंचा है. इसके बाद वह दुकानदार पर दबाव बनाता है और भावनात्मक तरीके से परेशान करता है. बताया जा रहा है कि कथित ठग नौकरी जाने का डर दिखाकर दोबारा रकम मांगता है. इस तरह फर्जी भुगतान का भरोसा दिलाकर एक ही पीड़ित से बार-बार पैसे ऐंठने की कोशिश की जाती है.
पहले भी सामने आने का दावा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कथित ठग द्वारा इस्तेमाल की जा रही फर्जी पहचान और आईडी पहले भी अलग-अलग स्थानों पर प्रसारित होने की बात सामने आयी है. दावा किया जा रहा है कि भारत-नेपाल सीमा से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी एसएसबी के नाम पर इसी तरह ठगी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं.
बताया जा रहा है कि ऐसे जालसाज खास तौर पर उन इलाकों को निशाना बनाते हैं, जहां एसएसबी के कैंप पहले से मौजूद हैं. इससे स्थानीय दुकानदारों और कारोबारियों के आसानी से झांसे में आने की आशंका रहती है.
एसएमएस या स्क्रीनशॉट देखकर भुगतान की पुष्टि न करें
साइबर ठगी से बचने के लिए किसी अनजान व्यक्ति की ओर से भेजे गये केवल एसएमएस या स्क्रीनशॉट पर भरोसा नहीं करना चाहिए. दुकानदारों को अपने बैंक ऐप, बैंक खाते या आधिकारिक बैंक सूचना के माध्यम से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वास्तव में रकम खाते में जमा हुई है या नहीं. यदि कोई व्यक्ति खुद को सेना, एसएसबी या किसी अन्य सुरक्षा बल का अधिकारी बताकर बड़ी मात्रा में सामान का ऑर्डर देता है और ऑनलाइन भुगतान की बात करता है तो पहले उसकी पहचान और ऑर्डर की पुष्टि करना जरूरी है.
एसएसबी कैंप या आधिकारिक नंबर से करें सत्यापन
ऐसे किसी भी ऑर्डर की स्थिति में संबंधित एसएसबी कैंप से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर या आधिकारिक संपर्क माध्यम से अधिकारी और ऑर्डर की पुष्टि करने की सलाह दी जाती है. किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते की संवेदनशील जानकारी साझा करने से भी बचना चाहिए.
दबाव में आकर अनजान खाते में न भेजें पैसा
किसी भी परिस्थिति में जल्दबाजी या दबाव में आकर अनजान बैंक खाते में रकम ट्रांसफर नहीं करनी चाहिए. संदिग्ध लेनदेन या ठगी की आशंका होने पर तुरंत स्थानीय पुलिस और साइबर अपराध हेल्पलाइन को सूचना देनी चाहिए. व्यापारियों और स्थानीय लोगों से अपील है कि सुरक्षा बलों के नाम का इस्तेमाल कर किये जा रहे किसी भी संदिग्ध ऑर्डर या भुगतान की पहले स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें, ताकि फर्जी ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के जरिए होने वाली ठगी से बचा जा सके.
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