बाल विवाह के विरुद्ध अभियान चलाकर लोगों को किया जागरूक
Updated at : 02 Mar 2026 7:29 PM (IST)
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बाल विवाह के विरुद्ध अभियान चलाकर लोगों को किया जागरूक
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मंत्री डॉ दिलीप जायसवाल ने हरी झंडी दिखाकर किया अभियान का शुभारंभ
कानून उल्लंघन पर दो साल की जेल व भारी जुर्माना का प्रावधान
किशनगंज. समाज में व्याप्त बाल विवाह जैसी कुरीति को जड़ से मिटाने के उद्देश्य से राहत संस्था द्वारा एक विशेष जागरूकता अभियान की शुरुआत की गयी है. इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ सूबे के उद्योग सह पथ मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल ने हरी झंडी दिखाकर किया. इस अवसर पर राहत संस्था की सचिव डॉ. फरजाना बेगम प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं, जिन्होंने समाज को इस कुप्रथा के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया. जागरूकता रैली का मुख्य उद्देश्य लोगों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के कड़े प्रावधानों से अवगत कराना है. रैली में यह संदेश दिया गया कि विवाह के लिए लड़के की आयु कम से कम 21 वर्ष और लड़की की आयु 18 वर्ष होना अनिवार्य है. इससे कम उम्र में विवाह करना कानूनी अपराध है. बाल विवाह करवाने वाले माता-पिता और रिश्तेदारों को दाे साल की जेल व एक लाख रुपये तक का जुर्माना (या दोनों) भुगतना पड़ सकता है. अभियान में यह भी बताया गया कि विवाह संपन्न कराने वाले पंडित, मौलवी या पादरी पर भी कानूनी कार्रवाई होगी. शादी में सेवा देने वाले नाई, हलवाई, बैंड-बाजा व टेंट संचालकों को भी दो साल की सजा व भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा. समारोह में शामिल होने वाले व्यक्ति भी कानून की दृष्टि में दोषी माने जाएंगे और उन पर समान सजा का प्रावधान है. राहत संस्था ने लोगों से अपील की है कि वे बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएं. बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए गंभीर खतरा भी है. सुरक्षित व सशक्त समाज के निर्माण के लिए जागरूक बनें व इस कुप्रथा के खिलाफ कदम उठाएं.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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