फौजी बनने का सपना टूटा तो नहीं मानी हार, 500 बत्तखों के साथ आत्मनिर्भरता की नई उड़ान भर रहे माधवपुर के रौशन

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माधवपुर में बत्तख पालन | Prabhat Khabar Network

सेना में भर्ती होने का सपना पूरा न होने पर भी रौशन कुमार ने हार नहीं मानी. 5 लाख रुपये का निवेश कर 500 बत्तखों के पालन से उन्होंने स्वरोजगार की राह चुनी और आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया.

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Khagaria News: सेना की वर्दी पहनने का सपना था. इसके लिए मेहनत की, तैयारी की और सफलता पाने की पूरी कोशिश की. लेकिन जब मंजिल नहीं मिली तो माधवपुर के रौशन कुमार ने खुद को रोकने के बजाय रास्ता बदल लिया. सरकारी नौकरी का सपना पूरा नहीं हुआ, तो उन्होंने स्वरोजगार को अपना सहारा बनाया.

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आज यही युवा 500 बत्तखों के साथ अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर रहा है. रौशन ने करीब पांच लाख रुपये की पूंजी लगाकर बत्तख पालन शुरू किया है. इसके लिए उन्होंने अपने स्तर से छोटा पोखर भी तैयार कराया है, ताकि बत्तखों को पालन के लिए अनुकूल वातावरण मिल सके.

रौशन की कहानी सिर्फ बत्तख पालन शुरू करने की नहीं है. यह उस सोच की कहानी है जिसमें नौकरी नहीं मिलने को जिंदगी की हार मानने के बजाय खुद रोजगार खड़ा करने की कोशिश की गयी.

सेना में जाने के लिए की थी पूरी तैयारी

माधवपुर गांव निवासी रौशन कुमार का सपना फौजी बनने का था. सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने की इच्छा के साथ उन्होंने तैयारी की. उन्होंने मेहनत और लगन से सेना में जाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.

कई युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षा या भर्ती में असफलता के बाद आगे की राह तय करना मुश्किल हो जाता है. रौशन ने भी इस असफलता का सामना किया, लेकिन इसे अपनी जिंदगी की अंतिम मंजिल नहीं माना.

उन्होंने तय किया कि अगर नौकरी नहीं मिली तो ऐसा काम शुरू किया जाए जिसमें मेहनत के दम पर अपनी आमदनी खड़ी की जा सके.

500 बत्तखों से शुरू किया नया सफर

रौशन ने बत्तख पालन को स्वरोजगार का माध्यम चुना. उन्होंने सीतामढ़ी से कुल 500 बत्तख खरीदी हैं. इनमें 50 मेल और 450 फीमेल बत्तख शामिल हैं.

बत्तखों के पालन को व्यवस्थित तरीके से करने के लिए उन्होंने अपने स्तर से एक छोटा पोखर भी तैयार कराया है. उनका प्रयास है कि बत्तखों को ऐसा वातावरण मिले, जिसमें उनका पालन बेहतर तरीके से किया जा सके.

रौशन के लिए यह सिर्फ शुरुआत है. फिलहाल 500 बत्तखों से शुरू किया गया काम आगे चलकर बड़े व्यवसाय में बदलने की उनकी योजना है.

पांच लाख रुपये लगाकर लिया जोखिम

बत्तख पालन शुरू करने में रौशन कुमार ने करीब पांच लाख रुपये की पूंजी लगायी है. इतनी बड़ी रकम लगाने के पीछे उनका उद्देश्य केवल तत्काल कमाई करना नहीं है.

वह इस काम को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना चाहते हैं. उनका लक्ष्य है कि मेहनत और सही प्रबंधन के जरिए बत्तख पालन से अच्छी आमदनी हासिल की जाये और वह आर्थिक रूप से अपने पैरों पर खड़े हो सकें.

एक युवा के लिए स्वरोजगार की शुरुआत अपने आप में चुनौतीपूर्ण होती है. इसमें पूंजी लगाने से लेकर रोजाना देखभाल और बाजार तक पहुंच बनाने की जिम्मेदारी भी खुद उठानी पड़ती है. रौशन ने इसी चुनौती को स्वीकार किया है.

नौकरी नहीं मिली तो खुद रोजगार खड़ा करने की कोशिश

रौशन कहते हैं कि फौजी बनने की इच्छा पूरी नहीं हो सकी, लेकिन उन्होंने इसे जिंदगी की हार नहीं माना. उन्होंने स्वरोजगार को आगे बढ़ने का रास्ता चुना.

उनका कहना है कि बत्तख पालन के जरिये वह खुद को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं. भविष्य में यदि कारोबार बढ़ता है तो दूसरे युवाओं को भी इससे रोजगार का अवसर देने की उनकी इच्छा है.

यही बात रौशन की पहल को खास बनाती है. उन्होंने रोजगार पाने वाले युवा से रोजगार पैदा करने वाले युवा बनने की दिशा में कदम बढ़ाया है.

Khagaria News: सरकारी नौकरी ही सफलता का एकमात्र रास्ता नहीं

रौशन की शुरुआत उन युवाओं के लिए भी एक संदेश देती है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं. नौकरी मिलना निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि है, लेकिन रोजगार का रास्ता सिर्फ सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं है.

पशुपालन, मत्स्य पालन, बत्तख पालन और दूसरे स्वरोजगार के क्षेत्र युवाओं को अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने का अवसर दे सकते हैं. हालांकि किसी भी व्यवसाय की तरह इसमें भी बाजार, लागत, प्रशिक्षण और उचित प्रबंधन महत्वपूर्ण हैं.

रौशन ने फिलहाल 500 बत्तखों के साथ अपनी यात्रा शुरू की है. करीब पांच लाख रुपये की पूंजी और अपने स्तर से तैयार किये गये पोखर के साथ वह इस काम को आगे ले जाने की कोशिश कर रहे हैं.

फौजी बनने का सपना भले ही पूरा नहीं हुआ, लेकिन रौशन ने हार मानने के बजाय एक नयी मंजिल चुन ली है. अब 500 बत्तखों के साथ शुरू हुआ यह सफर उन्हें कितनी दूर ले जाता है, यह आने वाला समय बताएगा. मगर उनकी कहानी यह जरूर बताती है कि मंजिल बदल सकती है, लेकिन आगे बढ़ने का हौसला बना रहे तो नयी राह हमेशा निकाली जा सकती है.

माधवपुर में बत्तख पालन | Prabhat Khabar Network
माधवपुर में बत्तख पालन | Prabhat Khabar Network


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