शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से, हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, दशमी पर मुर्गे पर होगी विदाई
मां दुर्गा की तस्वीर व शारदीय के बारे में जानकारी देते आगमानंद जी महाराज.
इस साल 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी, जो सुख-समृद्धि का संकेत है. हालांकि, 20 अक्टूबर को विजयादशमी पर मुर्गे पर विदाई जनमानस में विकलता का संकेत दे सकती है. जानें विस्तार से.
शारदीय नवरात्र इस वर्ष 11 अक्टूबर से शुरू होगी और 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ मां दुर्गा की विदाई होगी. धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्र में मां दुर्गा अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर पृथ्वी पर आती हैं. मां के आगमन और प्रस्थान के वाहन के आधार पर वर्ष के शुभ-अशुभ फल के संकेत माने जाते हैं.
हाथी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा
श्रीशिवशक्तियोगपीठ नवगछिया के पीठाधीश्वर एवं श्री उत्तरतोताद्रि मठ विभीषणकुंड अयोध्या के उत्तराधिकारी श्री रामचंद्राचार्य परमहंस स्वामी आगमानंद जी महाराज के अनुसार इस वर्ष 11 अक्टूबर रविवार को कलश स्थापना होगी. रविवार से नवरात्र शुरू होने के कारण धार्मिक मान्यता के अनुसार मां दुर्गा हाथी यानी गज पर सवार होकर आएंगी.
धार्मिक मान्यताओं में हाथी पर मां का आगमन शुभ माना जाता है. इसे अच्छी वर्षा, सुख-समृद्धि और धन-धान्य में वृद्धि का संकेत माना गया है. नवरात्र में मां के गज पर आगमन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहेगा.
विजयादशमी पर मुर्गे पर होगी मां की विदाई
20 अक्टूबर मंगलवार को विजयादशमी के दिन मां दुर्गा अपने पूरे परिवार के साथ मुर्गे यानी चरणायुध पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी. धार्मिक मान्यता के अनुसार मंगलवार को विजयादशमी होने पर मां का वाहन मुर्गा माना जाता है.
मान्यता में मुर्गे पर मां की विदाई को जनमानस में विकलता की स्थिति बने रहने का संकेत माना गया है. इस तरह इस वर्ष मां का आगमन शुभ संकेत वाला माना जा रहा है, जबकि प्रस्थान को लेकर धार्मिक मान्यताओं में सावधानी का संकेत बताया गया है.
रविवार और सोमवार को हाथी पर आगमन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार और सोमवार को नवरात्र शुरू होने पर मां दुर्गा हाथी पर आती हैं. शनिवार और मंगलवार को घोड़े, गुरुवार और शुक्रवार को डोली तथा बुधवार को नौका को मां का वाहन माना जाता है.
हाथी पर आगमन को अच्छी वर्षा और समृद्धि, घोड़े पर आगमन को युद्ध या अशांति, नौका पर आगमन को मनोकामना पूरी होने तथा डोली पर आगमन को रोग और कठिन परिस्थितियों से जोड़कर देखा जाता है.
प्रस्थान के वाहन का भी अलग महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार रविवार और सोमवार को विजयादशमी होने पर मां दुर्गा भैंसे पर, शनिवार और मंगलवार को मुर्गे पर, बुधवार और शुक्रवार को हाथी पर तथा गुरुवार को नर वाहन पर प्रस्थान करती हैं.
मान्यता में भैंसे पर प्रस्थान को शोक, मुर्गे पर जनमानस में विकलता, हाथी पर शुभ वर्षा और नर वाहन पर शुभ-सौख्य का संकेत माना जाता है.
भगवान राम ने भी की थी नवरात्र की आराधना
शक्ति की उपासना के लिए नवरात्र को विशेष महत्व दिया गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम ने भी नवरात्र में देवी की आराधना की थी. इसके बाद विजयादशमी के दिन रावण का वध कर धर्म की विजय स्थापित की.
श्रद्धा और विश्वास के साथ मां दुर्गा की आराधना करने से भक्तों को आत्मबल, शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है.
नवरात्र की तिथियां
- 11 अक्टूबर — प्रथम दिन, मां शैलपुत्री की पूजा.
- 12 अक्टूबर — द्वितीया, मां ब्रह्मचारिणी की पूजा.
- 13 अक्टूबर — तृतीया, मां चंद्रघंटा की पूजा.
- 14 अक्टूबर — चतुर्थी, मां कुष्मांडा की पूजा.
- 15 अक्टूबर — पंचमी, मां स्कंदमाता की पूजा.
- 16 अक्टूबर — षष्ठी, मां कात्यायनी की पूजा.
- 17 अक्टूबर — सप्तमी, मां कालरात्रि की पूजा.
- 18 अक्टूबर — अष्टमी, मां महागौरी की पूजा.
- 19 अक्टूबर — नवमी, मां सिद्धिदात्री की पूजा.
- 20 अक्टूबर — दशमी, विजयादशमी एवं मां दुर्गा की विदाई.
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