बारूण के पास कोसी का कटाव तेज, एक पखवाड़े से खतरे के साये में ग्रामीण

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फोटो केप्सन -इतमादी के बारूण गांव समीप हो रहा कटाव। | Prabhat Khabar Network

फोटो केप्सन -इतमादी के बारूण गांव समीप हो रहा कटाव। | Prabhat Khabar Network

Barun Kosi River Erosion: कोसी नदी का कटाव तेज होने से बेलदौर के बारूण और पचबीघी गांव में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. फ्लड फाइटिंग का काम शुरू न होने से ग्रामीण दहशत में हैं और एक दशक पहले की तबाही को याद कर रहे हैं.

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Barun Kosi River Erosion: बेलदौर प्रखंड के इतमादी पंचायत स्थित बारूण गांव के पास कोसी नदी का कटाव पिछले करीब एक पखवाड़े से लगातार जारी है. मानसूनी बारिश के बाद नदी के जलस्तर में वृद्धि से स्थिति और गंभीर हो गई है. ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों के निरीक्षण के बावजूद अब तक फ्लड फाइटिंग का काम शुरू नहीं हुआ है. इससे बारूण और पचबीघी गांव के लोगों में भय का माहौल है. लोगों को आशंका है कि यदि समय रहते सुरक्षा कार्य नहीं हुआ तो कोसी एक बार फिर बड़ी तबाही मचा सकती है.

निरीक्षण हुआ, लेकिन शुरू नहीं हुआ बचाव कार्य

ग्रामीणों के अनुसार 14 जुलाई को बाढ़ प्रमंडल-दो, सोनवर्षा के एसडीओ मनोज कुमार और जेई नवनीत कुमार ने फ्लड कंट्रोल टीम के साथ कटाव स्थल का निरीक्षण किया था. स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को मौके पर कटाव की गंभीरता से भी अवगत कराया था. इसके बावजूद करीब 15 दिन बीत जाने के बाद भी फ्लड फाइटिंग या कटाव रोकने का कोई स्थायी कार्य शुरू नहीं किया गया.

इस बीच नदी का दबाव लगातार बढ़ता गया और पहले कराए गए बोल्डर पिचिंग का हिस्सा भी धीरे-धीरे नदी में समाने लगा है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कटाव सीधे आबादी तक पहुंच सकता है.

एक दशक पुरानी त्रासदी फिर से सता रही

बारूण और आसपास के गांवों के लोगों की चिंता सिर्फ मौजूदा कटाव तक सीमित नहीं है. उन्हें करीब एक दशक पहले की वह त्रासदी याद आ रही है, जब कोसी नदी के कटाव में पुरानी डीह इतमादी के लगभग 400 घर नदी में समा गए थे.

इसके बाद कुंझारा गांव के करीब 60 परिवारों का आशियाना भी उजड़ गया था. इतना ही नहीं, गांव का प्राथमिक विद्यालय भी कटाव की भेंट चढ़ गया था. दोनों गांव पंचायत के नक्शे से लगभग समाप्त हो गए. आज भी कई प्रभावित परिवार स्थायी पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं.

आज भी खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे

कटाव प्रभावित पचबीघी गांधीनगर में शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित है. यहां के बच्चे वर्षों बाद भी खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं. सरकारी विद्यालय भवन का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो सका है.

जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने पूर्व में स्थल निरीक्षण के दौरान बच्चों की स्थिति पर चिंता भी जताई थी, लेकिन भूमि चयन और विभागीय स्वीकृति के कारण विद्यालय निर्माण का मामला अब तक आगे नहीं बढ़ पाया है.

जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर, विभाग अलर्ट पर

लगातार बारिश के कारण कोसी नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है. हालांकि विभाग का कहना है कि 22 जुलाई के बाद से जलस्तर में कुछ गिरावट दर्ज की गई है.

बाढ़ प्रमंडल-दो के जेई नवनीत कुमार के अनुसार सोमवार दोपहर करीब दो बजे नदी का जलस्तर 34.60 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 33.85 मीटर है. यानी नदी अभी भी खतरे के निशान से करीब 75 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. विभाग का कहना है कि पूरी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.

Barun Kosi River Erosion: ग्रामीणों की मांग, देर हुई तो बढ़ सकता है नुकसान

स्थानीय लोगों का कहना है कि कटाव निरोधी कार्य में हर दिन की देरी खतरे को बढ़ा रही है. उनका मानना है कि यदि फ्लड फाइटिंग तुरंत शुरू नहीं की गई तो बारूण, पचबीघी और आसपास के इलाकों में बड़ी क्षति हो सकती है.

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग से तत्काल कटाव रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा कार्य शुरू कराने की मांग की है.

क्या बोले कार्यपालक अभियंता

बाढ़ प्रमंडल-दो के कार्यपालक अभियंता मनीष कुमार ने कहा कि बारूण गांव के समीप हो रहे कटाव की अद्यतन जानकारी फ्लड कंट्रोल टीम से ली जा रही है. रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

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Amit Kumar Singh

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