चार माह थमेंगे मांगलिक कार्य, अब 20 नवंबर से फिर गूंजेगी शहनाई

सांकेतिक तस्वीर
अधिक मास के बाद 16 जून से शुरू हुए मांगलिक कार्यों का दौर अब थम गया है. गुरु के वृद्ध होने और चातुर्मास के कारण अगले चार माह तक कोई भी शुभ कार्य नहीं होगा. 20 नवंबर को तुलसी विवाह के बाद ही शहनाईयां गूंजेंगी.
खगड़िया : अधिक मास समाप्त होने के बाद 16 जून से शुरू हुए मांगलिक कार्यों का दौर अब थम गया है. रविवार को इस सीजन का अंतिम विवाह लग्न संपन्न होने के साथ ही सोमवार से शादी-विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन समेत अन्य सभी शुभ कार्यों पर विराम लग गया है. गुरु के वृद्ध होने तथा 25 जुलाई से शुरू हो रहे चातुर्मास के कारण अगले चार माह तक कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होगा. अब 20 नवंबर को तुलसी विवाह के बाद एक बार फिर शहनाइयां गूंजेंगी.
ज्योतिषाचार्य आचार्य श्रीनिवास ने बताया कि इस सीजन का अंतिम मांगलिक दिन 20 जुलाई था. इसके बाद गुरु के वृद्ध होने से 24 जुलाई तक कोई शुभ मुहूर्त नहीं है. वहीं 25 जुलाई से चातुर्मास प्रारंभ होगा, जो 19 नवंबर तक रहेगा. सनातन परंपरा के अनुसार इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत, मुंडन सहित अधिकांश मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं.
उन्होंने बताया कि 20 नवंबर को तुलसी विवाह के साथ पुनः मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी. इसके बाद 20 नवंबर से 12 दिसंबर तक विवाह के शुभ मुहूर्त रहेंगे. वहीं 16 दिसंबर से खरमास प्रारंभ होने के कारण एक बार फिर मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा.
बाजारों की रौनक पड़ी फीकी
लग्न समाप्त होने के साथ ही बाजारों में भी रौनक कम हो गई है. थोक किराना मंडी, फूल-माला, कपड़ा, ज्वेलरी, बर्तन और सजावट की दुकानों पर ग्राहकों की संख्या पहले की तुलना में काफी घट गई है. मांगलिक कार्य बंद होने का असर कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है.
विवाह भवन और मंदिरों में छाया सन्नाटा
विवाह के लिए प्रसिद्ध मंदिरों और विवाह भवनों में भी अब सन्नाटा पसरा हुआ है. कुछ दिन पहले तक जहां विवाह समारोहों की चहल-पहल और बैंड-बाजों की गूंज सुनाई देती थी, वहां अब शांति का माहौल है. स्थानीय कारोबारियों को उम्मीद है कि नवंबर में विवाह मुहूर्त शुरू होने के साथ ही बाजारों में फिर से रौनक लौटेगी.
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