कटिहार के पोखरिया स्कूल में मिड-डे मील को लेकर बवाल, अभिभावकों ने ताजा भोजन की उठाई मांग
उत्क्रमित मध्य विद्यालय पोखरिया में गुणवत्ता विहीन मध्यान्ह भोजन को लेकर आक्रोश | Prabhat Khabar Network
कटिहार जिले के पोखरिया स्कूल में मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर अभिभावकों और ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया. आरोप है कि बच्चों को खराब और बासी खाना दिया जा रहा है, जिससे बच्चे उसे खाने से मना कर रहे हैं. ग्रामीणों ने स्कूल में ही भोजन बनाने की मांग की है.
Katihar News: कटिहार जिले के हसनगंज प्रखंड अंतर्गत रामपुर पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय पोखरिया में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत उपलब्ध कराए जा रहे मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर गुरुवार को अभिभावकों और ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया.
ग्रामीणों का आरोप है कि सेंटर फॉर नेशनल डेवलपमेंट एनिशियेटिव के माध्यम से बच्चों को जो तैयार भोजन भेजा जा रहा है, उसकी गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है और कई बच्चे उसे खाने से इंकार कर रहे हैं.
भोजन की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
विद्यालय पहुंचे अभिभावकों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि भोजन में नमक और हल्दी का अत्यधिक प्रयोग किया जाता है, जिससे उसका स्वाद खराब हो जाता है.
उनका कहना है कि बच्चों को दिया जा रहा भोजन न तो ताजा लगता है और न ही स्वादिष्ट. कई बच्चों ने इसे खाने से साफ मना कर दिया है, जिससे मिड-डे मील योजना के उद्देश्य पर भी सवाल उठ रहे हैं.
गंध और गंदे बर्तनों की भी शिकायत
विद्यालय शिक्षा समिति के अध्यक्ष सह वार्ड सदस्य आनंद महतो, सचिव मुन्नी देवी, शिवानी देवी और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि भोजन लाने और रखने वाले बर्तनों की साफ-सफाई भी उचित नहीं रहती.
ग्रामीणों का आरोप है कि भोजन से गंध आती है और वह खाने योग्य नहीं लगता. विद्यालय परिसर में चावल और सब्जी फेंके जाने की बातें भी सामने आई हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाती हैं.
बच्चों ने भी बताई अपनी परेशानी
कक्षा सात की छात्रा रेमी कुमारी, शोभा कुमारी और छात्र राहुल कुमार ने बताया कि भोजन में उपयोग की जाने वाली सब्जियों की गुणवत्ता अच्छी नहीं होती.
उन्होंने कहा कि पिछले लगभग तीन महीनों से उन्हें पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन नहीं मिल रहा है, जिसके कारण कई बार भोजन ग्रहण करने का मन नहीं करता.
Katihar News: फिर से स्कूल में ही भोजन बनाने की मांग
अभिभावकों और ग्रामीणों ने मांग की कि पहले की तरह विद्यालय परिसर में ही रसोइयों द्वारा भोजन तैयार कराया जाए.
उनका कहना है कि स्कूल में ताजा और गर्म भोजन बनने से बच्चों को बेहतर पोषण मिलेगा और भोजन की गुणवत्ता पर भी स्थानीय स्तर पर निगरानी रखी जा सकेगी.
प्रधानाध्यापक बोले- शिकायत अधिकारियों तक भेजी जाएगी
विद्यालय के प्रधानाध्यापक सरोज कुमार ने बताया कि विभागीय व्यवस्था के तहत विद्यालय के शिक्षकों को मिड-डे मील संचालन से अलग रखा गया है और वर्तमान में यह कार्य एनजीओ के माध्यम से संचालित हो रहा है.
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों और अभिभावकों की शिकायतों की जानकारी वरीय अधिकारियों को भेजी जाएगी. साथ ही विद्यालय शिक्षा समिति की बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी.
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मिड-डे मील व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
यह मामला केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं माना जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय-समय पर भोजन की गुणवत्ता की जांच नहीं होगी, तो बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.
अब सबकी नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग और जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण मध्यान भोजन उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.
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