कैमूर के तीन ऐतिहासिक मेलों को राजकीय दर्जा देने की मांग, मुख्यमंत्री समेत अधिकारियों को भेजा ज्ञापन

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माता कुलेश्वरी देवी की तस्वीर | Prabhat Khabar Network

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Kaimur News : कैमूर जिले के दुर्गावती और रामगढ़ प्रखंडों में लगने वाले तीन ऐतिहासिक और धार्मिक मेलों को राजकीय मेला घोषित करने की मांग की गई है. कैमूर विकास मंच ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कुल्हड़ेश्वरी देवी मंदिर, देवहलियां और बैजनाथ शिव मंदिर मेलों के संरक्षण और विकास का आग्रह किया है.

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Kaimur News : कैमूर विकास मंच ने जिले के दुर्गावती और रामगढ़ प्रखंड में पारंपरिक रूप से आयोजित होने वाले ऐतिहासिक एवं धार्मिक मेलों को राजकीय मेला घोषित करने की मांग की है. इसको लेकर मंच की ओर से मुख्यमंत्री, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री तथा मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजा गया है.

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धार्मिक आस्था के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं मेले

ज्ञापन में कहा गया है कि कैमूर जिला अपनी सांस्कृतिक, पारंपरिक और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है. दुर्गावती और रामगढ़ प्रखंड में आयोजित होने वाले मेले केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, हस्तशिल्प, पारंपरिक औजार निर्माण और सामाजिक-सांस्कृतिक मेल-मिलाप की भी महत्वपूर्ण कड़ी हैं.

कुल्हड़ेश्वरी देवी मंदिर मेले के संरक्षण की मांग

कैमूर विकास मंच ने दुर्गावती प्रखंड के कुल्हड़िया स्थित कुल्हड़ेश्वरी देवी मंदिर मेला, रामगढ़ प्रखंड के ऐतिहासिक देवहलियां मेला तथा प्राचीन बैजनाथ शिव मंदिर मेला को राजकीय मेला घोषित करने की मांग की है.

मंच के अनुसार, कुल्हड़िया देवी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के दौरान लगने वाले मेले में पहले दूर-दूर से कारीगर और व्यापारी पहुंचते थे. यहां पत्थर एवं लकड़ी से बने सामान, पारंपरिक हस्तशिल्प, लोहे के औजार और कृषि उपयोगी सामग्री की दुकानें लगती थीं. संरक्षण के अभाव में यह पारंपरिक बाजार धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रहा है.

देवहलियां मेले का रहा है ऐतिहासिक महत्व

रामगढ़ प्रखंड का देवहलियां मेला श्रीकृष्ण जन्माष्टमी एवं शारदीय दुर्गा पूजा के अवसर पर आयोजित होता है. यह क्षेत्र पुरातात्विक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक मेल-मिलाप तथा ग्रामीण व्यापार का प्रमुख केंद्र भी रहा है.

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बैजनाथ शिव मंदिर मेला भी उपेक्षा का शिकार

इसके अलावा प्राचीन बैजनाथ शिव मंदिर मेला महाशिवरात्रि एवं पावन श्रावण मास के दौरान आयोजित होता है. मंच के अनुसार, सदियों पुराना यह मेला काष्ठकला, लोहारगिरी तथा घरेलू जरूरत की पारंपरिक सामग्री के व्यापार का प्रमुख स्थल रहा है. वर्तमान में यह मेला भी उपेक्षा का शिकार है.

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स्थायी बजट और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग

कैमूर विकास मंच ने सरकार से इन मेलों को राजकीय दर्जा देकर स्थायी बजट, प्रशासनिक संरक्षण, आधारभूत सुविधाएं और व्यवस्थित विकास उपलब्ध कराने की मांग की है. मंच का कहना है कि समय रहते इन ऐतिहासिक मेलों का संरक्षण नहीं किया गया तो क्षेत्र की अनमोल लोक-परंपराएं और पारंपरिक हुनर धीरे-धीरे समाप्त हो सकते हैं.

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